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नौकरी के बजाय सौर ऊर्जा संयंत्र से फलोद्यान की आय पर जताया भरोसा

5 वर्ष पहले
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सौरऊर्जा की अहमियत को अब पढ़े-लिखे युवा समझकर छोटे किसानों को उसकी उपलब्धता बता रहे हैं। धौलपुर जिले की तहसील राजाखेडा के गांव घड़ी जौनावद के 30 वर्षीय युवक प्रद्युम्न सिंह ने पोस्ट ग्रेजुएट की है। उसके पास 17 बीघा जमीन थी, जिसमें वह गेहूं बाजरे की फसल उगाता था। पानी की उपलब्धता के बावजूद खेतों में सिंचाई नहीं कर पाता था। चूंकि सिंचाई का साधन नहीं था। उसने अपने खेत पर खेत तलाई तो बनवा रखी थी, लेकिन बिजली निगम में 5 साल पहले आवेदन करने के बाद भी कनेक्शन नहीं मिला था। उसे बिजली कनेक्शन से हमेशा टाइम की समस्या, रात की समस्या, आंधी तूफान से खंभे टूटने की समस्या, बिजली बिल इत्यादि की आशंका अलग रहती थी। ऐसे में उसे सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने में फायदा नजर आया। उसने सौर ऊर्जा प्लांट लगवाने की ठानी। हॉर्टिकल्चर विभाग ने उसे सोलर प्लांट पर मिलने वाली तमाम जानकारी मुहैया कराई। उसने 5 हाॅर्स पावर का सोलर पंपसेट खरीदा। तीन साल पहले लगाए सोलर पंपसेट से आज उसकी इलाके में जागरूक कामयाब किसान के तौर पर पहचान है।

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