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बच्चों को दिए नहीं, स्टोर से निकलवा बाहर फिंकवाए स्पोर्ट्स प्रमाण-पत्र

5 वर्ष पहले
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राजकीयसीनियर सेकेंडरी गर्ल्स स्कूल में एक बार फिर से उस वक्त बड़ी लापरवाही देखने को मिली, जब स्कूल के कैम्पस में छात्राओं के पुराने स्पोर्ट्स प्रमाण-पत्र कचरे की तरह पड़े मिले। यही नहीं बच्चों के नाम लिखे पुराने स्पोर्ट्स प्रमाण-पत्र को स्कूल परिसर में ही आवारा जानवर खा रहे हैं। इस संबंध में जब स्कूल प्रशासन से बात की गई तो उन्होंने अपना पल्ला झाड़ते हुए छात्राओं के भविष्य की बेकद्री का दोष रिटायर्ड बाबू के ऊपर मढ़ दिया।

स्कूल प्रशासन का कहना है कि एक रिटायर्ड बाबू ने अभी तक चार्ज नहीं दिया है। ऐसे में वह अक्सर स्कूल समय के बाद में विद्यालय आते हैं। शायद उन्होंने स्टोर से रिकॉर्ड निकालकर बाहर डाल दिए होंगे। बता दें कि स्कूल कैंपस में ही कन्या महाविद्यालय का भी संचालन होता है। कन्या महाविद्यालय में हुए सड़क सुरक्षा सप्ताह कार्यक्रम की कवरेज से लौटते वक्त भास्कर को स्कूल कैंपस में आवारा जानवर घूमते हुए नजर आए। इस पर स्कूल के अंदर जाकर देखा गया तो वहां पर एक कमरे के बाहर से कुछ कागज उड़ते हुए दिखाई दिए, जिन्हें स्कूल में घूमती आवारा गाय खा रही थी। मौके पर कागजों को देखा गया तो वे स्कूल की छात्राओं के पुराने स्पोर्ट्स सर्टिफिकेट निकले।

स्कूल परिसर में दिनभर आवारा जानवर विचरण करते रहते हैं। ऐसे में इन्हें कोई रोकने वाला नहीं है। स्कूल परिसर में आवारा जानवरों के घूमने से स्कूलों छात्राओं को दुर्घटना की चिंता सताती रहती हैं। स्कूल की प्रिंसीपल सुषमा शर्मा ने बताया कि स्कूल के मुख्य गेट से आवारा जानवर अंदर चले आते हैं। स्कूल परिसर में ही कन्या महाविद्यालय का संचालन होता है। ऐसे में स्कूल के मुख्य गेट को बंद नहीं कर पाते हैं, क्योंकि महाविद्यालय की छात्राओं का आना-जाना लगा रहता है। उन्होंने बताया कि कॉलेज द्वारा किया गया अनुबंध समाप्त हो गया है, फिर भी कन्या कॉलेज का संचालन किया जा रहा है। इसके कारण परेशानी रही है।

स्कूल में जानवर करते हैं विचरण, कोई रोकने वाला नहीं

स्कूल स्टाफ बोला-िरकॉर्ड पुराना, होनी है नीलामी

स्टाफकी कुछ टीचरों ने बताया कि स्कूल के स्टोर में यह रिकॉर्ड काफी पुराना है और स्टोर में जगह को घेर रहा था। ऐसे में नीलामी के लिए स्टोर को खाली करा दिया गया है और सारे रिकार्ड को बाहर नीलामी के लिए रखवा दिया गया था। वहीं प्रिंसीपल का कहना है कि पुराने स्पोर्ट्स प्रमाण-पत्र बच्चों को नहीं बांटे गए, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। उन्होंने बताया कि उनके समय से सभी बच्चों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए हैं।

राजकीय सीनियर सेकेंडरी गर्ल्स स्कूल का मामला

विजेता खिलाड़ियों के प्रमाण-पत्रों को रद्दी में फेंकना गंभीर अनियमितता

^ नियमानुसार, इन प्रमाण-पत्रों को स्कूल प्रबंधन की ओर से संबंधित खिलाड़ी को समय पर दिया जाना चाहिए था। किन्हीं कारणों से यदि विजेता खिलाड़ी को उस समय प्रशंसा प्रमाण-पत्र नहीं दिया गया हो तो विद्यालय रिकॉर्ड में संधारित कर उन्हें सुरक्षित रखा जाना चाहिए था अथवा डाक माध्यम से संबंधित छात्र के पते पर भिजवाया जाना चाहिए था। इस तरह प्रमाण-पत्रों को रद्दी में फेंकना अनियमितता है। बच्चों के घर प्रमाण पत्र नहीं भेजना स्कूल प्रशासन की लापरवाही उजागर करता है।

राजेशशर्मा, जिलाध्यक्ष राजस्थान शिक्षक एवं पंचायती राज कर्मचारी संघ

रिटायर्ड बाबू ने नहीं दिया चार्ज, प्रमाण पत्र के बारे में नहीं है जानकारी

^मैंने तो नहीं देखे कि स्कूल में कौन से प्रमाण-पत्र पड़े हुए हैं। अगर पड़े हुए भी होंगे तो एक बाबू रिटायर्ड हो चुके हैं, लेकिन अभी तक उन्होंने चार्ज नहीं दिया है। वो स्कूल समय के बाद में विद्यालय आते हैं और शायद रिकॉर्ड डाल गए होंगे, हमें मालूम नहीं है। हमारे सामने जो भी बच्चों को प्रमाण-पत्र मिलते हैं, उन्हें दिए जाते हैं। पहले वालों की हमें कोई जानकारी नहीं है। विद्यालय में प्रमाण-पत्र अगर ऐसे पड़े हैं तो कमेटी बनाकर इसकी जांच कराएंगे।

सुषमाशर्मा, प्रधानाध्यापिका,

राजकीय बालिका माध्यमिक एवं उमा विद्यालय

धौलपुर. जमीन पर पड़े पुराने स्पोर्ट्स प्रमाण-पत्र।

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