स्वाइन फ्लू के लक्षण बचाव बताए
राजकीयकन्या कॉलेज में स्वाइन फ्लू पर विचार गोष्ठी हुई। मुख्य वक्ता डॉ जनार्दन सिंह परमार ने कहा कि विषाणु जनित रोग सबसे पहले सुअर में 1918 में देखा गया था, जिसने 50 लाख लोगों को प्रभावित किया। 1918 से लेकर 2009 तक इस रोग ने विभिन्न चरणों को पार किया तथा वर्तमान में 2014-2015 में यह रोग 2009 के वायरस से चल रहा है। इससे सबसे ज्यादा राजस्थान आंध्रप्रदेश के लोग प्रभावित हैं।
उन्होंने छात्राओं को बताया कि जनवरी फरवरी माह में फैलने वाला यह रोग सबसे ज्यादा चार वर्ष से कम आयु वाले बच्चों में तथा 65 वर्ष से ऊपर वाले बुजुर्गों में, गर्भवती महिलाओं, डायबिटीज, एचआईवी, अस्थमा आदि से ग्रसित व्यक्तियों में होता है। इस रोग का पता ग्रसित रोगी को चौथे दिन पता चलता है। स्वाइन फ्लू के लक्षणों में शरीर में दर्द, नाक से पानी आना, आंखों में दर्द, बुखार, थकान महसूस होना, गले में दर्द इत्यादि हैं। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए युवा विकास केंद्र के समन्वयक डॉ पीके सिंह ने कहा कि मनोवैज्ञानिक रुप से मन, भावनाओं, विचार संवेदनाएं को यदि सकारात्मक नैतिक स्वरूप दिया जाए तो शारीरिक कष्ट होने की संभावनाएं कम रह जाती हैं। कार्यक्रम के प्रश्नोत्तरी काल में डॉ लक्ष्मी गुप्ता, जयश्री पोसवाल, रश्मि पहाडिय़ा आदि ने प्रश्न पूछकर अपनी शंकाओं को दूर किया। छात्रासंघ अध्यक्ष बुलबुल गुर्जर ने धन्यवाद ज्ञापित किया। इस मौके पर डॉ हुकम सिंह, रचना सिंघल, मनीष पुरी, सुनील, निर्मल आदि मौजूद रहीं।
धौलपुर. छात्राओं से गंभीर बीमारी स्वाइन फ्लू के बचाव पर चर्चा करते डॉ परमार।