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डेढ़ माह में अपने देश से भी ज्यादा मिला स्नेह

6 वर्ष पहले
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हरबंग बंधु परिवार और उसके सदस्य के चेहरे पर मायूसी, आंखों में आंसू और हाथ जोड़कर सभी से प्यार भरा नमस्कार। मगर अपने वतन जाने की मजबूरी के बीच रविवार को 74 बांग्लादेशी अपने वतन को पुलिस संरक्षण में रवाना हो गए।

डेढ़ महीने की फुल्का परेड के बाद जैसे ही बांग्लादेशियों की रविवार सुबह हुई और पता चला कि आज उनकी स्वदेश रवानगी है। तभी से उनका मन चेहरा अजीब सा दिखाई दे रहा था। किसी के भी चेहरे पर भारत छोड़ने की इच्छा नहीं थी। करीब 7-8 वर्षों से यहां अपना जीवन यापन व्यतीत कर रहे 74 बांग्लादेशियों जिसमें पुरुष, महिला, युवती बच्चे शामिल हैं। गौरतलब है कि शहर में अवैध रुप से बार्डर पार कर जिले में रह रहे बांग्लादेशियों को करीब डेढ़ महीने पूर्व पुलिस ने नेशनल हाईवे स्थित राठौर कॉलोनी से पकड़ा था। उसके बाद एसपी ने इनसे जरुरी पूछताछ वतन वापसी की कवायद के लिए केंद्रीय जांच एजेंसियों को बुलाया था। इस दौरान बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर इनकी पुष्टि कराई गई थी। इसके बाद इन लोगों की बांग्लादेशी होने की पुष्टि होने के बाद इनके वतन वापसी की प्रक्रिया शुरु हो गई थी। इस दौरान कागजी खानापूर्ति के बीच इन्हें मचकुंड रोड स्थित रैन बसेरे में ठहराया गया था। रैन बसेरे में डेढ़ महीने 74 लोगों ने समय बिताया। जिनकी भोजन पानी की व्यवस्था नगरपरिषद अन्य समाजसेवी की ओर से की गई। इसके बाद रविवार को इन्हें दो बसों में 24 सदस्यीय पुलिस जाब्ते की देखरेख में भरतपुर ले जाया गया। जहां से इन्हें शाम 5 बजे अजमेर सियालदह एक्सप्रेस से सियालदह पुलिस दल के साथ भेजा गया। जहां पुलिस जाब्ता सियालदह पश्चिमी बंगाल बार्डर पर इन्हें बीएसएफ के सुपुर्द कर इनको अपने वतन भेजा जाएगा।

चार हजार रुपए में प्रति व्यक्ति बार्डर पार

आमासीन,हबीबउल्ला, शाकीम इत्यादि ने बताया कि भारत में हम रोजी रोटी की तलाश में यहां आए। इसके लिए हमें बांग्लादेश सीमा पर दलाल बार्डर पार करने के लिए प्रति व्यक्ति 4 हजार रुपए लेते थे। अपने देश में महंगाई के चलते भारत में मेहनताना अच्छा मिलता था और यहां के लोगों का प्रेम आपसी प्यार की भावना से हमें कभी अपने देश की याद नहीं सताती थी। यहां रहने के बाद हम अपने घरवालों से मिलने जाते थे, साथ में अच्छी आमदनी भी कमा कर ले जाते थे।

होंठ चुप, आंख आंसुओं से डबडबाई

जैसेही रैन बसेरे के कमरों में से बस में बैठने के लिए पुलिसकर्मियों द्वारा एक एक को आवाज दी। इसी क्षण उनके आंसू बह निकले और भावुक होकर बस में बैठते रहे। कई बांग्लादेशी तो पुलिस रैन बसेरे के कर्मियों से भूलवश की गलती की क्षमा याचना हाथ जोड़कर मांगते रहे। सभी की जुबान पर था कि इस देश की याद पल पल रुलाएगी। हर परिवार के सदस्य के व्यक्ति में वतन वापसी की खुशी नहीं दिखी। बस उनके चेहरे पर भारत छोड़ने का गम साफ झलक रहा था।

संभालकर ले जाने के दिए निर्देश

निहालगंजथाना के एसआई सोहनलाल शर्मा ने 24 सदस्यीय पुलिस स्टाफ को बांग्लादेश जाने के दौरान निर्देश दिए हैं कि वह इन्हें बार्डर तक हिफाजत से ले जाएं। वह ट्रेन के कोच में किसी को भी नहीं घुसने दें और खिड़की पर पल-पल में स्टाफ बदलता रहे। पुलिस दल में छह महिला कांस्टेबल शामिल हैं। सोहनलाल शर्मा ने कहा कि वतन वापसी तक उनकी पूरी तरह से सुरक्षित छोड़ने के बाद आप आराम से जिम्मेदारी पूरी कर सकते हैं।

शादी समारोह की दावत भी भाई

अग्निशमनकार्यालय के समीप रैन बसेरे में ठहरे बांग्लादेशियों को करीब 18 दिन तो नगरपरिषद की ओर से भोजन पानी की व्यवस्था की गई। इसके बाद नगरपरिषद से भोजन पानी की व्यवस्था बंद होता देख समाजसेवी नगरपरिषद उपसभापति के निजी खर्चे पर इनकी भोजन की व्यवस्था की गई। अग्निशमन अधिकारी मुकेश शर्मा ने बताया कि बांग्लादेशी परिवार यहां काफी खुश थे। लोगों की मदद जान पहचानों वालों के यहां से इनके लिए शादी समारोह चलने से कई-कई दिनों गुलाबजामुन, पुरी, सब्जी इत्यादि खाने की व्यवस्था करवाई। वतन वापसी की खबर सुनकर यह काफी भावुक हैं।

धौलपुर. पुलिस दल को निर्देश देते एएसआई सोहनलाल।

धौलपुर. अपने वतन को रवाना होता बांग्लादेशी परिवार।