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दिनभर चक्कर काटने के बाद भी नहीं बने कार्ड
धौलपुर. हाउसिंगबोर्ड के भारतीय आदर्श विद्या मंदिर में आयोजित भामाशाह शिविर में बुजुर्ग शोभाराम शर्मा अपनी प|ी शांति देवी के साथ सुबह आठ बजे से ही चक्कर काट रहे है। पूरे दिन अपने नंबर के लिए इधर से उधर चक्कर लगाने के बावजूद भी शाम चार बजे तक उनका कार्ड नहीं बन सका। दिनभर चक्कर काटने के बाद उन्हें बताया गया कि कार्ड बनाने वाली मशीन खराब है। ऐसे में अब जब भी पंचायत समिति में शिविर का आयोजन होगा तो यह कार्ड बनाया जाएगा।
कुछ इसी तरह का मामला इसी शिविर में आए विनय का है। वह भी अपनी बूढ़ी मां का कार्ड बनवाने के लिए शिविर में आए थे, लेकिन दिन भर धक्के खाने के बाद शाम को उन्हें बैरंग लौटना पड़ा है। यह दोनों मामले तो केवल बानगी है। इस समय जिले भर में जगह जगह भामाशाह शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। इन शिविरों में आधार कार्ड और भामाशाह कार्ड बनाए जा रहे है। इनमें से कोई भी ऐसी शिविर नहीं है जहां नागरिकों को इस तरह की दिक्कतें हों। इसकी मुख्य वजह भामाशाह कार्ड बनाने वाली मशीनों की खराब बताई जा रही है। कई जगह इन मशीनों की कमी के चलते भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ऐसे हालात में आए दिन हंगामे तक की नौबत रही है।
प्रशासन की ओर से जागरुकता के लिए ठोस प्रयास होने की वजह से अधिकांश नागरिकों ने यह मान लिया है कि भामाशाह कार्ड बनते ही उनके खाते में साढ़े पांच सौ रुपये हर महीने आने लगेंगे। ऐसे में जहां भी शिविर का आयोजन होता है, बड़ी संख्या में ग्रामीण टूट पड़ते है। ऐसे में अव्यवस्था फैल जाती है। वहीं दूसरी समस्या भामाशाह मशीनों की वजह से भी है। एक तो मशीनों की संख्या बहुत कम है। वहीं जिन मशीनों को लगाया गया है उनमें से अधिकांश की कंडीशन ठीक नहीं है और चलते चलते बैठ जाती है। ऐसे हालात में सुबह से ही कतार में खड़े ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है।