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जानवरों की सेवा करने में बीतता है पूरा दिन

6 वर्ष पहले
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जहांसुबह हुई, वहीं से उठकर हाथ में थैला लटकाए मूक जानवरों के लिए लोगों के सामने रुपए पैसे के लिए हाथ फैलाता एक 15 साल का बच्चा शहर में कई स्थानों पर आपको दिख जाएगा। हालांकि इसका लोगों के अनुसार इसका इस दुनिया में कोई नहीं है। लेकिन कहते हैं इस दुनिया में जिसका कोई नहीं होता है, उसका खुदा है यारो।

मगर इस बच्चे के जानवरों के प्रति प्रेम की बदौलत जानवर इतने संगदिल हो गए है कि वह उसकी एक आवाज में खींचे चले आते हैं। जो उसके अथाह प्रेम का ही परिणाम है। एक आवाज में बंदरों के झुंड इर्द-गिर्द आकर प्रेम से उसके हाथों से फल, ब्रेड, बिस्कुट इत्यादि खाते हैं। इसकी इस दिनचर्या से लोग भी काफी प्रभावित होकर उसकी मदद के लिए मना नहीं करते हैं। क्यांेकि वह भी सोचते हैं कि दिया हुआ पैसा सही जगह ही काम आएगा। मूक जानवर बंदर, गाय, परिंदों के लिए चुग्गा खिलाना उसकी दिनचर्या में शुमार है। यह सिलसिला सर्दी हो गर्मी या बरसात, उसके जुनून जोश के बीच जारी रहता है।

चर्चे शहर भर में

जानवरखासकर बंदरों से उसके प्यार और लगाव के किस्से मशहूर हैं। जहां इंसान ही इंसान का दुश्मन हो रहा है वहीं एक इंसान जानवरों तक पर प्यार लुटा रहा है। 15 साल के विष्णु बंदरों के साथ लगाव और उनका ध्यान रखने के चर्चे शहर में फैले हैं। विष्णु हर दिन लगभग 50-60 बंदरों को खाना खिलाता हैं। लोगों का कहना है कि वे बंदरों अन्य जानवरों से बहुत प्यार करता है। वहीं ये मूक जानवर भी उसके प्रेम की वजह से उसकी एक आवाज में दौड़े चले आते हैं। लोगों का कहना है कि जिन बंदरों से लोगों को डर लगता है। उन्हें गलती पर थप्पड़ मारता है और फटकारता है। विष्णु का कहना है कि इंसानों की तरह ही बंदरों की भी भावनाएं होती हैं। उन्हें भी इंसानों की तरह ही प्यार और देखरेख की जरूरत है।

खूंखार बंदर भी प्रेम के कायल

उसयुवक के प्रेम ने खुंखार बंदरों को भी प्यार कराना सिखा दिया है। रोज उनके लिए पैसे मांगकर खाने पीने की वस्तु खिलाकर इन मूक जानवरों का प्यार भी इस बच्चे से काफी लगाव भरा हो गया है। वह उसकी एक आवाज में दौड़े चले आते हैं। जब यह उन्हें अपने हाथों से खिलाता है तो वह खाना झपटने की बात पर उन्हें कान पकड़कर फटकारता भी है। मजाल है कि कोई भी बंदर उसे कुछ कह जाए।

धौलपुर. बंदरों को बुलाकर अमरूद खिलाता विष्णु।