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जलीय स्थलों पर छटा बिखेर रहे विदेशी परिंदे

6 वर्ष पहले
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शहरके तालाबशाही, कॉलेज के पास खंदी , निभी का ताल, चंबल, रामसागर बांध सहित जलीय स्थलों से अच्छी खबर है। यहां इस बार पैलिकन पक्षी सहित गुलाबी छटा के साथ ग्रेटर फ्लेमिंगों ने पड़ाव डाला है। वहीं बार हैडेड गीज भी बड़ी संख्या में देखी जा रही हैं।

ग्रेट व्हाइट पैलिकन पक्षी दुनिया के बड़े जलीय पक्षी की श्रेणी में आते हैं। पिछले कुछ सालों से इक्के-दुक्के पैलिकन पक्षी ही नजर आते थे, लेकिन इस बार यह सात से आठ की संख्या में नजर आए हैं। पैलिकन पक्षी की पहचान इसकी लंबी चोंच उसके पीछे बनी गले की थैली है। इस लचीली थैली का प्रयोग यह पक्षी शिकार के लिए करता है। एक बार में पैलिकन अपनी थैली में 11 लीटर पानी भर सकता है। यह पक्षी उथले पानी में एक साथ यू आकार में लाइन बनाकर मछलियों को छिछले पानी की ओर धकेलता है। फिर यह अपनी लंबी चोंच से आसानी से शिकार कर लेता है। ग्रेट पैलिकन की लंबाई एक से दो फीट के बीच होती है। जबकि इसका वजन 10 से 12 किलो होता है। दुनिया भर में पैलिकन की 8 प्रजातियां पाई जाती हैं। इनमें से तीन प्रजातियां ग्रेट व्हाइट पैलिकन स्पॉट बिल्ड दक्षिण पूर्वी एशिया के समुद्री तटों, नदियों, बडी झीलों के किनारे निवास करती हैं। वर्तमान में पैलिकन भारत में मेहमान पक्षी के रूप में आते हैं। हालांकि शहर में अभी तक व्हाइट पैलिकन ही देखा गया है। वहीं ग्रेटर फ्लेमिंगो पक्षी ग्रुपों में ही साथ खाना खाते हैं। इनकी सबसे अदा होती है। जब यह अपनी लंबी गर्दन घुमाकर एक दूसरे के साथ फूड शेयरिंग करते हैं। तब दोनों की गर्दन मिलकर घुमाव से दिल का आकार ले लेती है।

धौलपुर. कॉलेज के पास खंदी पर पानी में किलोल करते ग्रेटर फ्लेमिंगो।

धौलपुर. तालाबशाही पर पैलिकन पक्षी।