हंगामे के बीच विकास गौण
स्वच्छभारत अभियान की तैयारियों के तहत बुलाई गई नगर परिषद बोर्ड की मीटिंग एक बार फिर हंगामे की भेंट चढ़ गई। बोर्ड में विपक्ष के नेता नजीमुद्दीन ने चेयरमैन रीतेश शर्मा एवं आयुक्त रमाकांत अग्रवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए। चेयरमैन ने इस्तीफा देने की पेशकश कर मामला शांत कराने का प्रयास करना पड़ा। वहीं सत्ता पक्ष से पार्षद रहीश सामी ने भी आधा दर्जन से अधिक घोटाले का आरोप लगाते हुए सभी मामलों की सीबीआई जांच कराने की मांग की।
बोर्ड की मीटिंग जैसे ही शुरू हुई, विपक्ष के नेता नजीमुद्दीन ने यह कहते हुए विरोध शुरू कर दिया कि उन्हें मीटिंग की सूचना ही नहीं दी गई। आयुक्त उन्हें बार बार यह कहते नजर आए कि सूचना तो दी गई थी, लेकिन वह घर पर नहीं थे इसलिए उनके परिजनों से सूचना की रिसिविंग कराई गई है। बावजूद इसके नेता प्रतिपक्ष का गुस्सा थमने का नाम नहीं ले रहा था। उन्होंने कहा कि पांच साल हो गए, लेकिन विकास के नाम कुछ भी नहीं हुआ।
ऐसे में चेयरमैन ने कहा कि ठीक है वह इस्तीफा दे देते है। इससे मामला और गरमा गया। नेता प्रतिपक्ष समेत कुछ अन्य पार्षदों ने यह कहते हुए हंगामा शुरू कर दिया कि जब बोर्ड के पास पैसा था तो अकेले योजना बना रहे थे, अब पैसा नहीं है तो दूसरों के कंधे पर जिम्मेदारी डालकर खुद अपना बचाव करना चाहते है। पार्षद रहीश सामी ने आधा दर्जन से अधिक चर्चित मामलों में घोटाले का आरोप लगाते हुए सीबीआई से जांच कराने की मांग की। इन हंगामों के चलते बोर्ड की मीटिंग में तो विकास की चर्चा हुई और ही भारत स्वच्छता अभियान की।
^घोटाले जैसी कोई बात नहीं। कुछ पार्षदों को जानकारी नहीं है, बेवजह प्रेरणा नगर, मचकुंड फव्वारे का मुद्दा उठाते है। पार्षदों के आरोपों के बाद मैने कहा था इस्तीफा दे देता हँू , वह पार्षद उनकी जगह बैठकर विकास करा लें।
-रीतेशशर्मा, चेयरमैननगर परिषद
^नेता प्रतिपक्ष को मीटिंग की सूचना दी थी। इसकी रिसिविंग भी उन्हें दिखा दी। रही बात घोटालों की तो मैं यहां नया आया हूं, इस संबंध में चेयरमैन जाने और पार्षद जाने। वह जांच कराना चाहते हों तो करा सकते है।
-रमाकांतअग्रवाल, आयुक्तनगर परिषद
क्यों होता है हंगामा
नगरपरिषद के मौजूदा बोर्ड के कार्यकाल में महज 11 महीने शेष है। इसमें भी काम का समय बमुश्किल चार महीने ही है। जबकि अभी तक विकास के नाम पर कोई उपलब्धि नहीं है। ऐसे में