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बच्ची को गोद लेने के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं निसंतान दंपत्ति

7 वर्ष पहले
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चारदिन पहले अस्पताल में लावारिश हालत में मिली बच्ची को गोद लेने के लिए डॉ. मंगल सिंह सामान्य चिकित्सालय में जिले के निसंतान दंपत्ति रोज चक्कर काट रहे है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक अब तक ऐसे दर्जनों लोगों को समझा बुझाकर वापस लौटाया जा चुका है।

गौरतलब है कि चार दिन पहले डॉ. मंगल सिंह सामान्य चिकित्सालय परिसर में कोई निर्मोही मां ने अपनी चार माह की बेटी को लावारिश छोड़ दिया था। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष ने बच्ची को सार संभाल के लिए भरतपुर स्थिति शिशुगृह पहुंचा दिया। करीब दो माह पूर्व भी इसी तरह से एक बच्ची अस्पताल में लावारिश हालत में मिली थी। उस बच्ची को भी बाल कल्याण समिति ने शिशुगृह पहुंचा दिया था। अब इन बच्चों को गोद लेने के लिए जिले के निसंतान दंपत्ति अस्पताल प्रबंधन से संपर्क कर रहे है। अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक बच्ची को गोद लेने की इच्छा रखने वाले सभी लोगों को जिला प्रशासन या बाल कल्याण समिति में संपर्क करने को कहा जा रहा है। उधर, बाल कल्याण समिति के पदाधिकारियों ने बताया कि बच्चों को गोद देने के लिए जिले में जिला दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी नाम से एक कमेटी का गठन किया गया है। जिला कलेक्टर इस कमेटी के अध्यक्ष है। कमेटी की बैठक में ही लावारिश बच्चों को गोद देने की औपचारिकता पूरी होती है। इसमें आवेदक उपलब्ध बच्चों में अपनी पसंद तो बता सकते है, लेकिन किस दंपत्ति को कौन सा बच्चा दिया जाएगा, यह निर्णय एजेंसी करती है।

^बच्चेको गोद लेने के लिए कई लोग लगातार पूछताछ कर रहे है। सभी को बाल कल्याण समिति में संपर्क करने को कहा है।

-डॉ.केके अग्रवाल, पीएमओ

^गोददेने की प्रक्रिया मामले में एफआर लगने के बाद शुरू होती है। हालांकि इसके लिए निसंतान दंपत्ति कभी भी आवेदन कर सकते है। उन्हें एजेंसी की बैठक में पात्रता एवं उपलब्धता के आधार पर बच्चा गोद दिया जा सकता है।

-धनीरामशर्मा, अध्यक्षबाल कल्याण समिति

कैसे करें आवेदन

बच्चोंको गोद लेने के लिए निर्धारित पात्रता रखने वाला कोई भी दंपत्ति जिला दत्तक ग्रहण संसाधन एजेंसी के सदस्य सचिव एवं बाल सरंक्षण गृह के सहायक निदेशक के पास आवेदन कर सकता है। इसके लिए वह चाहे तो वेबसाइट www.adoptionindia.nic.in पर भी ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। इस आवेदन के बाद बच्चों की उपलब्धता के आधार पर जब भी कमेटी की बैठक होगी, एजेंसी आवेदक की प्राथ