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इच्छा मृत्यु के पत्र को लेकर हलकान रहा प्रशासन

7 वर्ष पहले
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धौलपुर. राजस्थानके मुख्य न्यायाधीश को 17 सितम्बर को एक व्यक्ति ने पत्र प्रेषित कर 18 सितम्बर को आत्मदाह कर इच्छामृत्यु की इजाजत चाही गई। इस संबंध में राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश ने कार्यवाहक जिला एवं सत्र न्यायाधीश धौलपुर को पत्र लिखकर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए। इसकी सूचना पर गुरुवार को न्यायालय परिसर में जिला प्रशासन एवं पुलिस की ओर से एहतियात के तौर पर पुलिस जाप्ता तैनात किया गया। साथ ही न्यायालय परिसर में सिविल ड्रेस में पुलिस अधिकारी एवं जवान तैनात दिखाई दिए। जिससे पुलिस एवं प्रशासन हलकान नजर आया।

सिटी सीओ संतकुमार यादव ने बताया कि राजस्थान के मुख्य न्यायाधीश को पुराना शहर धौलपुर निवासी राहुल कुमार पुत्र रामदास नामक छात्र ने 17 सितम्बर को पत्र प्रेषित कर इच्छामृत्यु की इजाजत चाही गई। पत्र में लिखा था कि वह दो वर्ष से लगातार न्याय विभाग द्वारा आयोजित कनिष्ठ लिपिक की परीक्षा देता रहा है। लेकिन वर्ष 2013 की कनिष्ठ लिपिक परीक्षा निरस्त कर दी गई थी तथा वर्ष 2014 में आयोजित कनिष्ठ लिपिक परीक्षा का परिणाम नियम विरूद्ध घोषित किया गया। इस पर उच्च न्यायालय द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है। अत: वह समाज एवं परिवार में घोर उपेक्षित महसूस होने के कारण उसे न्यायालय परिसर में आत्मदाह कर इच्छामृत्यु की इजाजत दी जाए। सिटी सीओ संतकुमार यादव ने बताया कि 17 सितम्बर को राजस्थान मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखकर इच्छामृत्यु की इजाजत मांगने वाले युवक की पुराना शहर अन्य स्थानों पर तलाश की गई, लेकिन इस नाम एवं बलदियत का कोई भी युवक पुराना शहर में नहीं रहना पाया गया है।

इसके साथ ही राहुल कुमार पुत्र रामदास नामक का युवक न्यायालय की वर्ष 2014 की परीक्षा में भी नहीं बैठा था। उन्होंने बताया कि उक्त युवक की पहचान होने पर उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 309 के तहत मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। गौरतलब है कि वर्ष 2014 में न्याय विभाग द्वारा आयोजित कनिष्ठ लिपिक परीक्षा का परिणाम पूर्व में ही घोषित किया जा चुका था। लेकिन राजस्थान उच्च न्यायालय में दायर हुई याचिका हेमंत कुमार बनाम जिला एवं सेशन न्यायाधीश धौलपुर के पारित निर्णय के बाद उक्त परीक्षा परिणाम रोक दिया गया था तथा अंतिम परीक्षा परिणाम नियुक्तियां संबंधित आदेश उच्च न्यायालय के विचाराधीन है।