पूजन का मुहूर्त सुबह11:48 से दोपहर 12:20 बजे तक पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त
धौलपुर. 12 फरवरी यानि आज वसंत पंचमी है। वसंत पंचमी को अबूझ सावा होने के साथ ही सर्वार्थ सिद्धि अमृत योग भी है। वसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजन का विशेष महत्व रहता है। इस दिन भगवान विष्णु सरस्वती का पूजन होता है। पीले फूल, गुलाब, धूप, दीप से पूजा की जाती है। भगवान को पीले मीठे चावल पीले मिष्ठान का भोग लगाया जाता है। जिले भर में वसंत पंचमी धूमधाम से मनाई जाएगी। सरकारी प्राइवेट स्कूलों के साथ विभिन्न संस्थाओं में भगवान विष्णु मां सरस्वती की पूजा-अर्चना कर ज्ञान की कामना की जाएगी। साथ ही विभिन्न प्रतियोगिताएं होंगी। वहीं बालिका शिक्षा को प्रोत्साहन देने की दिशा में प्रतिभावान बालिकाओं को बोर्ड परीक्षा में उपलब्धियों के आधार पर सम्मानित करने के लिए ब्लॉक स्तरीय गार्गी पुरस्कार वितरण समारोह का आयोजन किया जाएगा।
मां सरस्वती का हुआ इस दिन प्राकट्य
महंतकृष्णदास के अनुसार, ब्रह्मा जी ने सृष्टि की रचना करने के बाद मनुष्य की रचना की। उन्होंने अनुभव किया कि केवल मनुष्य मात्र की रचना से ही सृष्टि की गति को संचालित नहीं किया जा सकता है। विचारों की अभिव्यक्ति होने से ज्ञान का प्रसार नहीं हो सकता और ऐसी नि:शब्द सृष्टि का औचित्य नहीं है। उन्होंने भगवान विष्णु से अनुमति लेकर चतुर्भजी स्त्री की रचना कर उन्हें मां सरस्वती का नाम दिया। इनके एक हाथ में वीणा, दूसरे में वर मुद्रा, तीसरे में पुस्तक चौथे हाथ में माला थी।
किसानों के लिए भी है महत्व
वसंतपंचमी को श्रीपंचमी भी कहते हैं। इन दिनों खेतों में गेहूं, जौ और सरसों की फसलों की छटा देखते ही बनती है। खासकर सरसों के खेत में खिले पीले फूल हर किसी के मन को मोह लेते हैं। किसान ये स्वर्णिम बालियां भगवान विष्णु को अर्पित करते हुए उनकी और मां सरस्वती की पूजा करते हैं। इस दिन पीले रंग को विशेष प्रमुखता दी जाती है।
बसंत ऋतु... ऐसा मौसम जिसमें माहौल खुशनुमा होता है और सबकुछ सुहाना लगता है। वसंत की बात हो और सरसों के खेत का जिक्र हो यह असंभव है। आम आदमी तो सरसों के खेत देखकर ही मौसम का अंदाजा लगाता है। वसंत पंचमी की पूर्व संध्या पर एसएन कॉलेज की छात्राओं ने कॉलेज के बगल में स्थित सरसों के खेत में कुछ इस अंदाज में झूमीं और इसे कैद किया हमारे फोटो जर्नलिस्ट विवेकशर्मा ने।
कुछ यूं झूमकर आया वसंत...