पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • National
  • अनाथ बच्चों का बचपन संभालने में जिला, प्रदेश में अव्वल

अनाथ बच्चों का बचपन संभालने में जिला, प्रदेश में अव्वल

4 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
कौन- कौन हो सकता है योजना का पात्र : ऐसेबच्चे जिनके माता पिता की मृत्यु हाे चुकी हैं या माता पिता आजीवन कारावास की सजा काट रहे हो या पिता की मत्यु हो गई हो या माता पिता में से कोई भी कुष्ठ रोग, थैलेसिमिया, एड्स सहित अन्य गंभीर बीमारी से पीड़ित हो या मां बच्चों को छोड़कर चली गई हो ऐसे बच्चों को सरकार योजना का पात्र मानती हैं।

अनाथहुए बचपन को संवारने के लिए बीते दो वर्ष में जिले में काफी प्रशंसनीय संतोषजनक कार्य हुआ है। इससे ना केवल सिर से माता-पिता का साया उठने के बाद बचपन संभला है बल्कि जिला 314 प्रतिशत ग्रोथ के साथ जयपुर सहित अन्य सभी जिलों को पीछे छोड़कर प्रदेश में पहले पायदान पर है।

यूं तो सरकार की ओर से अनाथ बच्चों का बचपन संवारने के लिए 2005 में एससी वर्ग के लिए पालनहार योजना की शुरूअात की गई थी, लेकिन 2007 में इसे सभी वर्गो के लिए कर दिया गया था। तब से लेकर 31 मार्च 2015 तक ना तो किसी ने अनाथ होने के बाद आर्थिक कारणों से बर्बाद होते बचपन की सुध ली और ना योजना की प्रगति की। अप्रैल के बाद लगातार योजना में काम हुआ है।

इससे ना केवल बर्बाद होते बचपन को संवारकर आगे बढ़ने का सहारा मिला है बल्कि योजना की प्रगति में जिला राजधानी जयपुर सहित अन्य बड़े जिलों को पीछे धकेल कर प्रदेश में पहले पायदान पर आकर खड़ा हो गया। योजना में करीब 2 वर्ष में जिले में हुए ऐतिहासिक 314.12 प्रतिशत ग्रोथ का मूल कारण महिला कलेक्टर शुचि त्यागी की बर्बाद होते बचपन को देखकर पिघली मां की ममता को माना जा रहा है। आपको बता दें कि वर्ष 2015 में शुचि त्यागी धौलपुर कलेक्टर के पद पर पदस्थापित होने के बाद ग्रामीण इलाकों में रात्रि चौपाल जन सुनवाई कार्यक्रमों में गई तो उन्हें कई अनाथ बच्चे फटे कपड़े दयनीय स्थिति में मिले। जो कि योजना के पात्र थे लेकिन किसी ने रूचि नहीं दिखाकर उन्हें योजना में शामिल नहीं कराया था।

धौलपुर - 314.12

भरतपुर - 172.57

जयपुर शहर - 186.43

जयपुर ग्रामीण - 184.88

कोटा - 133.52

जोधपुर - 118.99

बीकानेर - 184.96

कवायद

खबरें और भी हैं...