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लोगों को दिलाया नशामुक्ति का संकल्प

7 वर्ष पहले
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सद्भभावना,नैतिकता तथा नशा मुक्ति के उद्देश्य को लेकर दिल्ली के लाल किले से शुरू हुई अहिंसा यात्रा का रविवार सुबह आचार्य महाश्रमण की अगुवाई में शहर में मंगल प्रवेश हुआ। शहर के समाजबंधुओं ने यात्रा के स्वागत में पलक पावड़े बिछा दिए। विश्व अहिंसा यात्रा का जैन समाज के लोगों ने जगह जगह आरती उतारकर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया गया।

यात्रा सुबह सब्जी मंडी, लाल बाजार, पैलेस रोड सहित मुख्य बाजारों से होते हुए भार्गव वाटिका पहुंची। इस बीच जगह जगह लोगों ने आरती उतारी। यह यात्रा तीन देश, 12 राज्य और 10 हजार से अधिक किलोमीटर की पदयात्रा कर रही है। जो भारत में नशामुक्ति का संदेश देते हुए नेपाल भूटान में जाएगी। यात्रा का शुभारंभ दिल्ली में 9 नवंबर 2014 को हुआ है।

सुबह भार्गव वाटिका में प्रवचन के दौरान आचार्य महाश्रवण जी ने उपस्थित हजारों लोगों को नशामुक्ति के लिए संकल्प दिलाकर शपथ दिलाई। इस अवसर पर लाखों लोगों को ह्दय परिवर्तन के द्वारा नशामुक्त बनाने वाले आचार्य महाश्रमण की अहिंसा यात्रा के दौरान नशामुक्ति का अभियान निरंतर गतिमान है। आचार्य श्री का मानना है कि नशा पतन के मुख्य कारणों में से एक है। शारीरिक, मानसिक, व्यवसायिक, पारिवारिक, सामाजिक, चैतसिक आदि अनेक नुकसान नशे से हो सकते हैं। आचार्य वर्षों से स्वयं की चेतना को जकड़ने वाली नशे की बेडियों को तोड गिराते हैं और नशामुक्त जीवन जीने का संकल्प स्वीकार करते हैं। उनका पवित्र आभामंडल और स्नेह सिंचित आत्मीयतापूर्ण पथदर्शन आगंतुकों के भीतर नई प्रेरणा भरता है।

इस मौके पर यात्रा के प्रणेता आचार्य महाश्रवण ने प्रवचन देते हुए कहा कि जब जब मानवता ह्रास की ओर बढ़ती जाती है। नैतिकता मूल्य अपनी पहचान खोते जाते हैं। समाज में पारस्परिक संघर्ष की स्थितियां बनती है। ऐसे में कोई कोई महापुरुष मानव की चेतना को झंकृत कर जन जागरण का काम करता है। उन्होंने कहा कि हम सभी को सद्गगुणों में सद्भाव पूर्ण व्यवहार करने का प्रय| करना चाहिए। आचार्य ने कहा कि अहिंसा यात्रा ह्रदय परिवर्तन के द्वार अंधकार से प्रकाश की ओर प्रस्थान का अभियान है। यह यात्रा कुरीतियों में जकड़ी ग्रामीण जनता और तनावग्रस्त शहरी लोगों के लिए वरदान है। उन्होंने कहा कि जाति, संप्रदाय, वर्ग और राष्ट्र की सीमाओं से परे इस यात्रा से बच्चों, युवाओं और वृद्धाें के जीवन में सद् गुणों की