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तारीखों में उलझी पेट की भूख

7 वर्ष पहले
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77वर्षीय बुजुर्ग कृष्णा देवी प|ी स्वर्गीय गोकुल सिंह निवासी गोहद वाली माता के सामने दशहरा रोड का इस समय पूरा दिन कोर्ट की सीढ़ियां चढ़ने में गुजर रहा है। कृष्णा देवी अपने ही बेटे से दो जून की रोटी के लिए मुकदमा लड़ रही है। बेटा है कि उन्हें देखभाल करने से मना कर दिया है। वहीं कोर्ट में राहत के नाम पर उन्हें केवल तारीख पर तारीख दे रही हैं।

यहां उन्हें कायदे से तीन माह के अंदर न्याय मिल जाना चाहिए था, लेकिन उन्हें दो साल से अधिक हो गए, घर से एसडीएम कोर्ट के चक्कर लगाते हुए। एसडीएम कार्यालय से मिली जानकारी के मुताबिक पति के देहांत के बाद उनके बेटे ने भी उनकी देखभाल करना छोड़ दिया। उन्होंने 3 अक्टूबर 2012 को एसडीएम कोर्ट में दावा पेशकार भरण पोषण खर्च की मांग की।

कृष्णा देवी के मुताबिक उनका एक ही बेटा है। उसे उन्होंने बड़े लाड़ प्यार से पाला था, सोचा था कि बुढ़ापे में वह उनकी लाठी बनेगा। लेकिन अब उसी बेटे और बहु ने देखभाल तो दूर, एक जून की रोटी के लिए भी तरसा दिया है। हालात से तंग आकर उन्होंने एसडीएम कोर्ट में धारा 4(1) (3) माता पिता वरिष्ठ नागरिकों का भरण पोषण अधिनियम 2007 के तहत दावा पेश कर 6 हजार रुपए प्रति माह दिलवाने की गुहार लगाई। उन्होंने अपने दावे में बताया है कि उनका बेटा आरईसीएल कंपनी में 18 हजार रुपए प्रतिमाह पर नौकरी करता है।

तीनमाह में करना होता है निर्णय

नियमानुसारभरण पोषण के मामलों का निस्तारण तीन माह में करना होता है। विशेष परिस्थिति में इस अवधि को बढ़ा कर चार माह किया जा सकता है। बावजूद इसके इस मामले में दावा पेश हुए 26 माह से अधिक हो गए है। लेकिन अभी तक पीड़िता को केवल तारीख ही मिली है।

भरण पोषण भत्ता पाने के लिए भटक रही है बेवा

हालात

कृष्णा देवी।