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सोए समाज को जागरूक करना ही संतों का काम

6 वर्ष पहले
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श्रीरामकथा का मूल मन्त्र राम सीता जैसा बनना तो है ही, लेकिन श्रीराम कथा के माध्यम से सोए हुए समाज को जागृत करना भी सन्तों का काम है। ये उदगार श्रीराम कथा मर्मज्ञ आचार्य सतीश कौशिक महाराज ने स्थानीय गंगाबाई की बगीची में धर्म जागरण समन्वय विभाग द्वारा आयोजित श्रीराम कथा में व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि श्रीराम कथा कलयुग में कामधेनु के समान है। राम नाम स्मरण एवं श्रीराम कथा श्रवण मात्र से ही जीव कष्टों से छुटकारा पा सकता है।

गोस्वामी तुलसीदास जी ने श्रीरामचरितमानस के रूप में अमृत प्रदान किया है। आज के विसंगतिपूर्ण वातावरण में अगर श्रीराम के आर्दश को अपना लिया जाए तो मानव जीवन का उद्देश्य पूरा हो जाएगा। श्रीराम कथा जीव के जन्म-जन्मांतर की व्यथा हर लेती है। रामकथा सुनने से जीव का संशय समाप्त हो जाता है और दुख दूर हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि श्रीराम के चरित्र को भगवान शिव ने अपने मानस में उतार रखा है, इसीलिए तुलसीदास ने अपने पवित्र ग्रंथ का नाम श्रीराम चरित मानस रखा। उन्होंने बताया कि राम के चरित्र को सुनने, समझने और गुनने से व्यक्ति का कल्याण निश्चित है। कौशिक जी महाराज ने कहा कि व्यक्ति के तीनों तापों और छहों विकारों से उत्पन्न दुखों का राम नाम नाश कर देता है।

उन्होंने कर्म की शुद्धता पर बल दिया और कहा कि जितनी कर्म की शुद्धता होगी, भगवान उतनी ही व्यक्ति पर कृपा करेंगे। कर्म करना व्यक्ति के वश में है इसलिए व्यक्ति को कर्म करते रहना चाहिए और सब कर्मों को राम के अधीन छोड़ देना चाहिए। श्रीराम कथा का सार बताते हुए कौशिक जी महाराज ने कहा कि जिन्होंने रामकथा नहीं सुनी उनके कान साँप के बिल के समान हैं और यदि व्यक्ति में राम भक्ति नहीं आई तो ऐसे लोगों की छाती बज्र के समान है, जिन्होंने राम नाम जप को अपनी जीभ में नहीं उतारा ऐसे लोगों की जीभ मेंढक और चमगादड़ के समान है। अन्त में उन्होंने कहा कि इस समय आसुरी शक्तियां बहुतायत में सिर उठा रहीं हैं, ऐसे में समाज को एकजुट होकर इनका राम के चरित्र से प्रेरणा लेकर मुकाबला करना होगा। इससे पूर्व गंगाबाई की बगीची के महन्त गोपाल दास, हनुमान दास, डाॅ. हरीशंकर शर्मा, रामप्रकाश जगरिया, रामअवतार सिंह, गोविन्द, गोपाल अवस्थी, मनोज त्रिपाठी, रमाशंकर शर्मा, मुकेश सूतैल आदि ने आचार्य सतीश कौशिक महाराज का उनके साथ पधारे कलाकारों का माल्यार्पण, शॉल, श्रीफल राम नामी दुपट्टा भेंटकर स्वागत किया। महन्त गोपालदास हनुमानदास ने भगवान राम के चित्र पर द्वीप प्रज्वलन माल्यार्पण कर आरती की। श्रीराम कथा की समाप्ति के बाद धर्म जागरण समन्वय विभाग के तहसील संयोजक गोपाल अवस्थी ने सभी का आभार व्यक्त किया।

धौलपुर। सत्संग में मौजूद महिलाएं।

धौलपुर। रामकथा का श्रवण करते श्रद्धालु।

धौलपुर। रामकथा वाचन करते कौशिक।