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एकीकरण से शिक्षकों में असमंजस

7 वर्ष पहले
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प्रदेशमें सन 2011 से राजकीय प्राथमिक विद्यालयों में सतत एवं व्यापक मूल्यांकन शिक्षण प्रणाली एवं इससे पहले लहर कक्षा 1 2 में शिक्षण प्रणाली चलाई जा रही है। यह शिक्षण प्रणाली कुछ ही विद्यालयों में प्रयोगात्मक रूप में संचालित है। डीडवाना तहसील में 9 विद्यालय हैं। इन्हें एकीकरण के तहत राउमाध्यमिक विद्यालय में समायोजित कर दिया गया। एकीकरण में लहर, सतत एवं व्यापक मूल्यांकन शिक्षण प्रणाली वाले अन्य विद्यालय एक जगह हो गए हैं। कक्षाएं भी सबको मिला कर बना दी गई हैं। नई प्रणाली के तहत कक्षा 5 में 40 बच्चों में से 27 बच्चे सतत एवं व्यापक मूल्यांकन वाले हैं। 13 बच्चे बिना शिक्षण प्रणाली वाले हैं। कक्षा 2 में 33 बच्चों में से 25 लहर वाले 8 बच्चे बिना लहर शिक्षण प्रणाली वाले हैं। इससे कई तरह की समस्याएं विद्यार्थी और अभिभावकों के सामने खड़ी हो गई हैं।

स्कूलों के सामने समस्या यह है कि इन विद्यार्थियों को किस प्रणाली से अध्ययन कराया जाए। जबकि बिना सतत एवं व्यापक मूल्यांकन में टेस्ट, अर्द्धवार्षिक वार्षिक परीक्षा नहीं होती है। जबकि बिना सतत एवं व्यापक मूल्यांकन वाले विद्यालयों में परीक्षाएं होती हैं। ग्रामीण कहते हैं कि अधिकारी भी इस संबंध में कोई स्पष्‍ट जवाब नहीं दे पा रहे हैं। लिखित में भी कोई देने को तैयार नहीं है। विद्यालयों के अध्यापकों के पास भी कोई विकल्प नहीं है। अध्यापकों के सामने समस्या यह है कि क्या वे सतत एवं व्यापक मूल्यांकन लहर शिक्षण प्रणाली बंद कर दें या दोनों प्रकार के बच्चों को यथावत पढ़ाएं। अध्यापकों का मानना है कि यथावत पढ़ाने से टेस्ट, अर्द्धवार्षिक वार्षिक परीक्षा भी ली जा सकेगी जिससे शिक्षण और शिक्षा की गुणवत्ता भी बनी रहेगी। कई स्कूलों में इस सत्र की सतत एवं व्यापक मूल्यांकन सामग्री गई है। अध्यापक कहते हैं कि हमारी समझ से बाहर है क्या करें क्या करें। इधर, अधिकारी भी कोई स्पष्ट आदेश या गाइड लाइन नहीं दे पा रहे हैं।