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सब इंस्पेक्टर के भरोसे संवेदनशील डीडवाना थाना
आनंदपालसिंह गैंग के बढ़ते आतंक के बीच डीडवाना थाना अधूरे स्टॉफ से संचालित हो रहा है। यहां निरीक्षक स्तर के थाना प्रभारी समेत 32 पुलिसकर्मियों के पद खाली हैं। यह थाना पिछले कुछ माह से उप निरीक्षक स्तर के अधिकारी के भरोसे ही चल रहा है।
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार आज तक यहां पूरे पद भी नहीं भरे जा सके हैं। जीवनराम गोदारा हत्याकांड के मुख्य गवाह के भाई के अपहरण की घटना के बावजूद यहां आज भी थाना प्रभारी नहीं लगाया गया है। फिलहाल थाना प्रभारी का जिम्मा उप निरीक्षक घनश्याम मीणा के पास है।
बड़ी वारदातों के बीच यह सवाल उठने लगा है कि इतने कम पुलिस बल के भरोसे एक संवेदनशील उपखंड की सुरक्षा कैसे की जा सकती है? यहां के लोग भी कहते हैं कि कई सरकारें बदल गई मगर पुलिस थाने में अभी तक पुलिसकर्मियों की संख्या में कोई बढ़ोतरी नहीं हो पाई। सुरक्षा की दृष्टि से डीडवाना शहर के लोग भय के माहौल में जी रहे हैं।
ये पद पड़े हैं खाली
डीडवानाशहरी क्षेत्र की आबादी करीब एक लाख है। थाना अंतर्गत 53 गांव आते हैं। दोनों क्षेत्रों की आबादी करीब 2 लाख है। दो चौकियां एक बालिया एवं शहरी क्षेत्र में स्थापित है। थाने में एएसआई के 5 पद हैं जिसमें 4 पद रिक्त हैं। हैडकांस्टेबल के 8 में से 5 पद , कांस्टेबल के 40 में 22 पद रिक्त पड़े हैं। पुलिस निरीक्षक का पद भी रिक्त है। हालांकि आरएसी के 12 जवान यहां रहते हैं, जबकि वृत्त सर्किल के अंतर्गत आरएसी के 30 पद स्वीकृत हैं परंतु अन्य को लाडनूं क्षेत्र में लगा रखा है।
एक पेशी जो बनी परेशानी
2006में घटित हुए जीवण गोदारा दोहरे हत्याकांड के बाद क्षेत्र में भय दहशत है। गोदारा हत्याकांड के आरोपियों की एडीजे न्यायालय में रोज सुनवाई होती है। ऐसे में आरोपियों को भारी पुलिसबल के साथ लाया जाता है। प्रतिदिन पुलिस को कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। शहरवासी भी कहते हैं कि कई सरकारें बदल गई मगर थाने में पुलिसकर्मियों की संख्या नहीं बढ़ सकी।
डीडवाना शहर में अगर कोई बड़ा अपराधी पकड़ा जाता है। उस समय अचानक कोई घटना हो जाए तो थाने का पूरा पुलिस जाब्ता घटनास्थल पर पहुंच जाता है। ऐसी स्थिति में थाने में 1-2 सिपाही रहते हैं। गहलोत या वसुंधरा सरकार दोनों में ही लंबे अंतराल से खाली पद आज तक नहीं भरे जा सके हैं।
कई सरकारें आईं, पद नहीं भर पाईं
लगातार बढ़ रही हैं आपराधिक घटनाएं