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इस्लाम आतंक का नहीं, मोहब्बत का पैरोकार है: अशरफी
छत्तीसगढ़राज्य वक्फ बोर्ड अध्यक्ष मोहम्मद सलीम अशरफी ने कहा कि इस्लाम आतंक का नहीं बल्कि मोहब्बत का पैरोकार है। भारत की संस्कृति स्नेह, भाईचारे एवं मित्रता की संस्कृति है।
इसमें अनेक धर्मों, मजहबों एवं जातियों के लोग निवास करते हैं। कोई भी धर्म नफरत की पैरोकारी नहीं करता। सब धर्मों का मूल मंत्र प्रेम है। अशरफी डीडवाना के बाँगड़ महाविद्यालय में मंगलवार को सेंटर फॉर एक्सीलेंस एवं युवा विकास केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित‘‘ भारत से आतंकवाद के समूलोच्छेदन में युवावर्ग की भूमिका’’ विषयक व्याख्यानमाला को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने हमेशा भाईचारे और अमन चैन का पैगाम दिया है। उन्होंने कहा कि आतंकवाद सम्पूर्ण राष्ट्र के लिए ही नहीं विश्व के लिए चिंतनीय समस्या है। आतंकवाद को किसी मजहब की देन बताना बड़ी भूल है। उन्होंने कहा कि इस्लाम ने भारत को ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती जैसे महापुरुष दिए हैं। भारत की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट है कि भारत में कभी हिंदू-मुस्लिम वैमनस्य नहीं रहा वरन यह पिछले 75-80 सालों की देन है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि राष्ट्रभक्ति का भाव संजोकर भारत को सर्वशक्तिमान सत्ता बनाना चाहिए। उन्होंने स्वदेशी को अपनाने पर बल देते हुए कहा कि युवाओं को संकल्प लेना चाहिए कि स्वदेशी अपनाकर हम राष्ट्र की बहुत बड़ी सेवा कर सकते हैं। कार्यक्रम के विशिष्ट अतिथि एवं मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक जनाब सैयद अबूबकर नकवी ने कहा कि राष्ट्रीय विषयों को राष्ट्र की युवाशक्ति तक पहुंचाने का कार्य फिन्स करती है।
नकवी ने आतंकवाद से लड़ने के लिए देश के सभी नागरिकों की भावनात्मक एकता की आवश्यकता पर बल दिया। विशिष्ट अतिथि सैनिक कल्याण अधिकारी मैजर मनोहरसिंह राठौड़ ने कहा कि अकेली सेना ही नहीं वरन सम्पूर्ण देश के सामूहिक प्रयास से आतंकवाद पर नियंत्रण पाया जा सकता है।
यहभी बोले
कार्यक्रमअध्यक्ष प्राचार्य प्रो. प्यारेलाल ने हिंदू-मुस्लिम एकता को भारत की सबसे बड़ी विशेषता बताया। उपाचार्य डॉ. केजी. शर्मा, कार्यक्रम समन्वयक डॉ. एनआर.ढाका ने विचार रखे। वक्ताओं ने डीडवाना में हिंदू संत तथा शहर काजी के एक मंच पर रहने एवं सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल को अविस्मरणीय बताया। संयोजक डॉ. चंद्रप्रकाश गौड़, डॉ. गजादान, छात्रसंघ