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क्रय-विक्रय सहकारी समिति में मनमर्जी के प्रस्ताव
ब्लैंक चेक जिन पर पहले से मुख्य व्यवस्थापक और लेखापाल के साइन है।
इफ्को की बैठक में भूपेंद्र पंड्या को नामित किया गया और अध्यक्ष के साइन ही नहीं।
डूंगरपुर. 20 मई 2014 की संचालक मंडल बैठक की प्रोसिडिंग दर्ज नहीं है
पेज न. 162 जिसमे प्रोसिडिंग नहीं लिखे जाने पर क्रॉस लगाकर नोटरी कराया।
डूंगरपुर. केवीएसएस डूंगरपुर।
^चेक पर कई बार साइन एडवांस में ही मुझसे करा लेते है। इससे यदि मैं बाहर हूं तो भुगतान हो सकता है। -गटूलालभाटिया, स्टोरकीपर
^मेरी जानकारी के बिना इफ्को की बैठक में शामिल होने का प्रस्ताव भेजा गया। मुख्य व्यवस्थापक को केवल वोट देने के अधिकार है, चुनाव लड़ने का नहीं। इसके बाद भी मनोनयन आगे भेज दिया गया, जबकि 72 घंटे में प्रोसिडिंग लिखी जानी चाहिए। निलंबन के मामले में भी कोई प्रस्ताव नहीं लिया गया, केवल एक सदस्य ने बात रखी थी, जिस पर मुहर नहीं लगी थी। इसे भी प्रस्ताव बताकर बहाली कराई गई, जबकि उस पेज पर भी 72 घंटे में प्रोसिंडिंग नहीं लिखी थी। मैंने दोनों मामलों की प्रोसिंडिंग में हेराफेरी की आशंका के चलते नोटरी से सत्यापन कराया था। खाली चेक पर भी पहले से साइन कराकर वित्तीय अनियमितता की जा रही है। -रतनलालपाटीदार, चेयरमैन
^सारा मामला मनगढ़ंत है। बैठक के तत्काल बाद कोई फोटोकॉपी करा ले तो प्रोसिडिंग कैसे लिखी जा सकती है। नॉटरी से वैरीफाई तो यूं ही हो जाता है, मैं भी अभी जाकर करा सकता हूं। जांच में जो भी होगा वो सामने आएगा। -भूपेंद्रपंड्या, मुख्यव्यवस्थापक
भास्कर न्यूज. डूंगरपुर
क्रय-विक्रयसहकारी समिति में सरकारी दस्तावेजों में मनमर्जी की जा रही है। जिसे जो उचित लगे, होता रहा। गड़बड़ी दिखने पर आरोप एक-दूसरे पर लगाए जाते रहे। प्रोसिडिंग लिखे बिना प्रस्ताव भेजकर हित साधने की अनियमितताएं हो रही है। गड़बड़ी की आशंका के चलते जांच सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक के एमडी आशुतोष भट्ट को सौंपी है।
जांच में देरी होने से अध्यक्ष और मुख्य व्यवस्थापक के बीच चल रहे विवाद की सच्चाई नहीं खुल रही है। गड़बड़ी भी ऐसी कि जो स्वीकारी जा रही, रोकी जा रही। ऐसे में पूरी व्यवस्था शक के दायरे में है। डूंगरपुर केवीएसएस का इफ्को में साढ़े 12 लाख रु. का शेयर है। वजह, मतदान के लिए एक प्रतिनिधि इफ्को महासभा में शामिल होता है, जो उदयपुर में वोटिंग के बाद दिल्ली के चुनाव में शामिल होता है। मतदान