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अफसरों को जाने में सुविधा रहे, उन्हीं स्कूलों की दूसरी मर्तबा हो रही जांच
कलेक्टर ने जांची भोईवाड़ा स्कूल
डूंगरपुर। संबलनअभियान के तहत कलेक्टर इन्द्रजीतसिंह ने स्थानीय ब्लॉक के राउप्रावि भोईवाड़ा का अवलोकन किया। संस्थाप्रधान हवचंद मोड पटेल ने बताया कि अवलोकन में कक्षाओं ने अध्ययन-अध्यापन कार्य, वाचनालय, प्रार्थना सभा, भौतिक सुविधा, एसएमसी और मिड-डे-मील की जांच की।
केस 3 : प्रारम्भिकशिक्षा परिषद जयपुर के सहायक निदेशक सुभाष कौशिक को भी विभाग की सर्वश्रेष्ठ स्कूल सिद्डी खेरवाड़ा और छापी दी गई है। इन स्कूलों को भी पहले जांचा गया है। ऐसे में जयपुर के इस अधिकारी को दूर का स्कूल दिया जा सकता था।
केस 2 : सीईओपरशुराम धानका को इस बार नोडल केंद्र राउप्रावि खापरड़ा में राप्रावि रातीघाटी और नोडल केंद्र राउप्रावि घाटी की राउप्रावि बांसवाड़वाड़ा जांच के लिए दी गई। इसी स्कूल को वर्ष 2012 में शिक्षा अधिकारियों ने जांच लिया था।
केस 1 : संबलनअभियान की जांच सूची में एसडीओ सिद्वार्थ सिहाग को जांचने के लिए दिए स्कूलों का पहले ही निरीक्षण हो चुका है। सिहाग ने पहले दिन राउप्रावि नवाडेरा और राप्रावि आसेला की जांच की। इन दोनों स्कूलों को सितंबर माह में कलेक्टर ने जांच लिया है। इससे पूर्व कलेक्टर पूनम ने भी दिसंबर 2012 में इन दोनों स्कूलों की जांच की थी।
^कुछ स्कूलें रिपीट हुई है। जिसकी जानकारी मुझे कल प्राप्त हुई थी। सूची बनाते समय कुछ गड़बड़ी हो सकती है। संबंधित आरपी से स्पष्टीकरण मांगते हैं। -करुणाशंकरजोशी, एडीपीसी, सर्व शिक्षा अभियान डूंगरपुर
एजुकेशन रिपोर्टर|डूंगरपुर
स्कूलोंमें पढ़ाई और बच्चों का बौद्धिक स्तर जांचने के लिए चलाए जा रहे संबलन अभियान का कोई नतीजा निकलता नहीं दिख रहा। शिक्षा विभाग ने इस बार भी उन्हीं स्कूलों को जांच के लिए चुना है, जिनकी पहले ही जांच हो चुकी है। सर्व शिक्षा अभियान के अधिकारी इसे सूची बनाने में हुई गड़बड़ी मनाते हैं, लेकिन इस गलती पर भी गंभीर नहीं हैं। इधर, जिलेभर में 1 हजार 700 स्कूल अब भी ऐसे हैं, जिन्हें जांचने के लिए अब तक कोई नहीं पहुंचा है।
इस बार अभियान के तहत अब तक कई अधिकारी स्कूलों की जांच कर चुके हैं, जिसमें 20 प्रशासनिक और 10 शिक्षा विभाग के शामिल हैं। इन्होंने अब तक रोड साइड के स्कूलों का चयन किया। जिससे प्रशासनिक अधिकारी स्कूलों तक आसानी से पहुंच सके, वही उन्हें किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं हो। शिक्षा विभाग की ओर से दो साल से यह अभियान को चलाया जा रहा है। हर साल करीब 250 से 300 स्कूलों को जांचने की औपचारिकता करते हैं। इस हिसाब से तीन वर्ष में करीब 800 स्कूलों का निरीक्षण हुआ। जिले के करीबन 2 हजार 500 स्कूल हैं। जिसमें से 1 हजार 700 स्कूलों की अभी तक कोई चैकिंग नहीं हुई है।
येहै स्कूल चुनने के मापदंड
अभियानमें एक शैक्षणिक सत्र में तीन बार स्कूलों की जांच करना जरूरी है। इसमें किसी अधिकारी के नहीं आने पर एक दिन रिर्जव दिन होता है। जिसमें जांच कर सकते हैं। नियमानुसार एक बार सरकारी स्कूल की जांच होने के बाद उस स्कूल की पुन: जांच नहीं होगी।