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भुवनेश्वर कॉलोनी के वेस्ट की निकासी का प्रबंध नहीं

6 वर्ष पहले
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गेपसागरझील को गंदा करने की तैयारी चल रही है। नए बस स्टैंड के सामने बसाई जा रही भुवनेश्वर कॉलोनी के गंदे वेस्ट की निकासी का बंदोबस्त नहीं होने से इसे अब नाला खोदकर झील में उड़ेलने के प्रयास चोरी छूपे हो रहे है।

नया बस स्टैंड के सामने भुवनेश्वर कॉलोनी में अभी करीब 50 मकानों में लोग रहने चुके है। इतने ही मकान अब बनकर तैयार होने को है। इन मकानों की प्लॉटिंग करने से पहले टाउन प्लानिंग में गंदे पानी की निकासी का कोई स्पष्ट बंदोबस्त नहीं दिया गया है।

आखिरकैस हो रही निकासी

यहांकॉलोनी के बीच में नालियां सड़कें बनाई जा रही है। इन नालियों को मुख्य सड़क के दोनों ओर बनाए&ठ्ठड्ढह्यश्च; गए दो नालों से जोड़ दिया गया है। ये नाले ऑवरफ्लो हो गए है। इनमे जमा गंदगी दूर दूर तक बदबू मार रही है, बाउंड्री वॉल तक नाले खोद दिए गए है। कॉलोनी की बाउंड्री वॉल के ठीक आगे गेपसागर की कच्ची रिंग रोड है। नालों की सीध में बाउंड्री को तोड़ दिया गया है। अब इन नालों को कच्ची रिंगरोड को काटकर बीच में से गेपसागर झील में खोलने की तैयारियां चल रही है। रात में नालों को थोड़ा थोड़ा खोदकर झील तक जोड़ने के प्रयास हो रहे है।

क्याहोंगे नाले को झील से जोड़ने के साइड इफेक्ट : गेपसागरझील में शास्त्री कॉलोनी के गंदे नाले से भी गंदगी रिसकर प्रदूषण फैला रही है। इसी तरह रिंग रोड पर बने एक हॉटल के गंदे पानी की निकासी की भी व्यवस्था नहीं है। अमूमन यह स्थित झील के आसपास बसाई जा रही सभी बस्तियों की है। उनके गंदे पानी की निकासी का कोई बंदोबस्त नहीं है। अब भुवनेश्वर कॉलोनी के भी गंदे वेस्ट को झील में डालने की तैयारी है। गंदे वेस्ट में हानिकारक रसायन, तेलीय अपशिष्ट मलबा होता है। हानिकारक रसायनों से पानी जहरीला हो जाता है, जो जलीय वनस्पति जीवों के लिए जानलेवा होते है। तेलीय अपशिष्ट से पानी की सतह पर परत बन जाती है। तेल की इस परत के कारण झील के पानी में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है और उससे भी जीव वनस्पति का अस्तित्व संकट में होता है।