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45 लाख रु. में स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स के बैडमिंटन कोर्ट का विकास शुरू
स्पोर्ट्सकॉम्पलेक्स के विकास की ठप पड़ी राह अब आसान होती दिख रही है। प्रशासनिक सजगता से 45 लाख रुपए खेल विभाग को मिल गए हैं। प्रशासनिक देखरेख में अधूरे इंडोर बैडमिंटन कोर्ट का कार्य जोर शोर से शुरू हो चुका है।
स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स पर एक करोड़ से अधिक का बजट खर्च हो चुका है। साढ़े 52 बीघा जमीन अधिग्रहण के बाद भी कुछ विवादों और बजट के अभाव में एक दशक से काम रूका हुआ है। वर्ष 2006 के बाद से इस पर कोई काम नहीं हुआ। 1986 में खिलाड़ियों के विकास के लिए सर्वे शुरू हुआ था। विभाग ने इसकी बाउंड्री बनवाई थी, जो अब तक जर्जर हाल हो चुकी है। कई जगह से इसे भूमाफियाओं ने तोड़ दिया है तो आसपास के लोगों ने एक से दूसरी तरफ जाने के रास्ते बाउंड्री तोड़कर निकाल दिए है। साढ़े बीघा में से 90 फीसदी जमीन पर खेल विभाग ने कब्जा कर लिया था, लेकिन तीन खातेदारों ने पर्याप्त मुआवजा नहीं मिलने के कारण आज तक मौके से कब्जा नहीं छोड़ा। तीन में एक दो परिवार अब तक यही पर गुजर बसर करते हैं और एक परिवार ने पास ही नया मकान बना लिया है, हालांकि उसका कब्जा अब भी यथावत है।
राजस्थान आवास विकास संस्थान को निर्माण का कान्ट्रैक्ट दिया गया था, लेकिन पर्याप्त बजट नहीं मिलने से काम छोड़ दिया। इस पूरे विवाद को भास्कर ने सीरिज के रूप में 9 जून से लगातार प्रकाशित किया था।
इसके बाद नए कलेक्टर इंद्रजीतसिंह और तत्कालीन एसडीओ दीपेंद्रसिंह ने इसमे रुची दिखाई थी। पूरे मामले की स्टडी के बाद किसी तरह 45 लाख रुपए की स्वीकृति दिलाई और अब बैडमिंटन कोर्ट जो असामाजिक तत्वों का डेरा बन चुका था। वहां रंगरोगन, टीन शेड लगाने, अब तक हुई टूट-फूट दुरुस्त करने के कार्य हो रहे हैं।
डूंगरपुर। बैडमिंटन कोर्ट को ढकने के लिए स्टील की प्लेट्स फीट करते कारीगर।