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जिला अस्पताल में बगीचा बनाने में रूचि नहीं!
भर्तीमरीजों के साथ आने वाले परिजनों के बैठने के लिए जिला अस्पताल में कोई ठिकाना नहीं है। अस्पताल परिसर में बगीचा बनाने में भी प्रशासन की रुचि दिखाई नहीं दे रही है। यही कारण है कि बगीचे के लिए तय जमीन पर भी अब एमसीएच सेंटर तैयार हो रहा है। ऐसे में अस्पताल में बगीचे की उम्मीद भी टूट गई है।
श्रीहरिदेव जोशी राजकीय ‘ए’ ग्रेड अस्पताल में पोर्च के ठीक सामने ही बगीचे के लिए जमीन निर्धारित थी। इसके चारों ओर पिलर लगाकर लोहे के पाइप से बगीचे का रूप दिया था। लेकिन अस्पताल प्रशासन की उदासीनता के चलते ही आज तक बगीचा नहीं बन पाया। इसमें तो पेड़-पौधे लगाए गए और ही घास, ताकि मरीज के साथ आने वाले परिजन तसल्ली से दो मिनट बगीचे में गुजार सकें। जमीन तय बनने के बाद भी यह उजड़ा हुआ ही रहा। कंटीली झाडियां उगी हुई थी। अस्पताल में बगीचा तो नहीं बन पाया, लेकिन अब उसी जमीन पर एमसीएच (मदर एंड चाइल्ड सेंटर) बन रहा है। बगीचे की तय जमीन के आधे भाग निर्माण कार्य चल रहा है। वहीं आधे भाग पर ठेकेदार ने अस्थाई केबिन बनाकर कार्य करवाया जा रहा है। बगीचे की तय जमीन पर निर्माण के चलते अब यह कम पड़ जाएगी। ऐसे में जिला अस्पताल होने के बाद भी यहां बगीचे की कोई सुविधा नहीं है।
जिला अस्पताल में बगीचे की जगह पर बनाया जा रहा एमसीएच सेंटर।
भर्ती मरीजों से लेने वाले चार्ज से करेंगे विकास
सघन निरीक्षण अभियान में देखेंगे बगीचा है या नहीं
^अस्पताल में बगीचे के लिए विशेष बजट नहीं है। अस्पताल को निजी आय से ही बगीचा विकसित करना है। भर्ती और जांच पर मरीजों से कुछ चार्ज लेने का निर्णय लिया है। इससे होने वाली आय से बगीचे के लिए नई जगह देखकर विकसित किया जाएगा।\\\'\\\' -डॉ. प्रताप परमार, पीएमओ