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अर्हत महापूजन के साथ नवान्हिका महोत्सव प्रारंभ

7 वर्ष पहले
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डूंगरपुर। मनुष्यजब अरिहंत परमात्मा की विशिष्ट पूजा करता है तो इस पूजा के प्रभाव से जीव मात्र को सुख की प्राप्ति होती है। यह बात आचार्य कुंद कुंद सूरीश्वर ने शुक्रवार को न्यू कॉलोनी जैन सोसायटी स्थित संभवनाथ जैन उपाश्रय में नवान्हिका महोत्सव में अर्हत महापूजन की महिमा का व्याख्यान करते हुए कही।

उन्होंने कहा कि परमात्मा की भक्ति से जगत के सभी जीवों का दु:ख, रोग, शोक और भय चला जाता है। ताकि जीव संसार में निरोग होकर विचरण कर सके। उन्होंने महापूजन की महिमा का व्याख्यान करत हुए कहा कि अर्हत महापूजन सबसे प्राचीनतम विद्बानों में से एक है। जिसमें 25 कुसुमांजलि का विधान कर सभी देवों को विनती की जाती है। शुक्रवार को विधान का आगाज आचार्य कुंद कुंद सूरीश्वर, मुनि धर्मविनयविजय, साध्वी क्षुतिप्रभाजी आदि ठाणा के सानिध्य में लाभार्थी परिवार नर्वदा बेन गोवर्धनलाल सरैया परिवार द्वारा किया गया। रात को सांस्कृतिक संध्या में प्रभु भक्ति का आयोजन किया गया।

नवान्हिका महोत्सव के तहत अर्हत महापूजन कराते आचार्य ससंघ।

संभवनाथ जैन उपाश्रय में नवान्हिका महोत्सव में अर्हत महापूजन करते श्रद्धालु