पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • फालकी माता एनीकट के 21 लाख रुपए टीएडी को लौटाए

फालकी माता एनीकट के 21 लाख रुपए टीएडी को लौटाए

7 वर्ष पहले
  • कॉपी लिंक
डूंगरपुर। फालकीमाता एनीकट अब नहीं बन सकेगा। एनीकट निर्माण के लिए टीएडी की ओर से जारी 21 लाख रु का बजट जल संसाधन विभाग ने रिटर्न कर दिया है।

जल संसाधन विभाग के डूंगरपुर डिवीजन के रातापानी वनक्षेत्र में फालकी माता एनीकट का विवादित निर्माण रोकते हुए 21.03 लाख रुपए टीएडी को लौटा दिए है। वित्तीय वर्ष 2012-2013 में मुख्यमंत्री घोषणा से स्वीकृत फालकी माता एनीकट को बनाने के लिए वन क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों का राजनैतिक हित था। राजनैतिक दबाव के चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फालकी माता एनीकट की स्वीकृति जनजाति विकास विभाग के जरिए जारी की थी।

कामशुरू होने के बाद रुका

एनीकटनिर्माण के लिए हुए टेंडर पर जल संसाधन विभाग ने गत वर्ष सितंबर 2013 को वर्कऑर्डर भी जारी किए गए थे। जैसे ही कार्य शुरू हुआ तो वन विभाग ने काम रुकवा दिया।वन विभाग के अनुसार जमीन जंगल की होने से उस पर किसी तरह का निर्माण वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की एनओसी के बिना नहीं हो सकता। जल संसाधन विभाग के एसई एक्सईएन स्तर के अधिकारियों ने तत्कालीन उपवन संरक्षक राजसंदीप सहित आला अधिकारियों को पत्र लिखकर काम शुरू कराने की डिमांड भी की थी। राजनीतिक दबाव बढ़ा तो वन विभाग ने फाइल लखनऊ भेज दी। तब से काम रुका है। इस बात को एक वर्ष हो गया है। परेशान होकर जल संसाधन विभाग ने बजट टीएडी को लौटा दिया है। जल संसाधन विभाग का कहना था कि यदि वन विभाग खुद ही निर्माण अपने स्तर पर करना चाहता है, तो बजट उसे ट्रांसफर कराया जा सकता है। लेकिन मामला लखनऊ ट्रांसफर हो गया और बजट लौटाना पड़ा।

^रातापानी में फालकी माता एनीकट का पैसा रिटर्न हो गया है। इस मामले को कल ही मीटिंग में कमिश्नर को अवगत कराया जाएगा। इसके बाद आगे से जो भी गाइडलाइन मिलेगी, उसी अनुरूप एक्शन होगा।\\\'\\\' -करतारसिंह,परियोजनाअधिकारी, टीएडी

^कार्य शुरू होने के बाद लंबे समय से रुका पड़ा है। हमने बजट टीएडी विभाग को लौटा दिया है।\\\'\\\' -एलआर. रोत, जलसंसाधनविभाग, डूंगरपुर

^जंगल की जमीन पर निर्माण संभव नहीं है। निर्माण करना ही था तो पहले इसके लिए प्रक्रिया से एनओसी ली जानी चाहिए थी। एनओसी मिल जाए तो वे निर्माण कर सकते हैं।\\\'\\\'- डीएसराठौड़, एसीएफवन विभाग।

जाना पड़ सकता था जेल

वनविभाग की जमीन पर निर्माण के लिए नियमानुसार वन विभाग से एनओसी लेनी चाहिए थी। यह जिम्मेदारी बजट दे