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\"श्रद्धा हो तो सब कुछ हो सकता है\'

7 वर्ष पहले
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शहरमें मुनि 108 श्री उदार सागरजी महाराज के सानिध्य में हो रहे ऐतिहासिक कल्पद्रुम महामंडल विधान के तहत मंगलवार को विविध धार्मिक अनुष्ठान कराए गए। इस मौके पर शहर के कई समाजबंधुओं ने शिरकत की। कार्यक्रम में हुई धर्मसभा में मुनि 108 श्री उदार सागरजी ने आशीर्वचन में कहा कि संसार समुद्र अपार है, जिसकी कोई सीमा या बाध्यता नहीं है। व्यक्ति, भक्ति रूपी जहाज पर बैठकर समुद्र रूपी संसार से भव पार कर सकता है। संसार सागर बहुत बड़ा है। संसार सागर को पार करना हो तो श्रद्धापूर्वक देव, शास्त्र, गुरुओं की पूजा-अर्चना करनी होगी। श्रद्धा हो तो सब कुछ हो सकता है।

परम पूज्य मुनि श्री उपशांत सागरजी महाराज ने अपने प्रवचन में कहा कि भक्ति रागादिक नहीं होनी चाहिए, भक्ति बिना राग के श्रद्धा से होनी चाहिये। भगवान की पूजा-अर्चना अच्छी सामग्री से करनी चाहिए, अच्छी वेशभूषा में होनी चाहिये ताकि श्रावक भक्ति के रंग में घुल जाता है और अपने पापों का क्षय हो जाता है। प्रवक्ता भरत नागदा ने बताया कि कल्पद्रुम महामंडल विधान के कार्यक्रम में विधान के चौथे दिन कल्पद्रुम महामंडल विधान का पूजन किया गया। जिसमें भरतचक्रवर्ती धूरीलाल और स्वधर्म इंद्र का लाभ लक्ष्मीलाल महायज्ञ नायक इंद्र का लाभ मगनलाल धताणा वालों ने लिया। जिन्होंने 22 फीट ऊंचे समवशरण पर बैठकर पूजा-अर्चना की।

आज होंगे यह अनुष्ठान

साधुसेवा समिति के अध्यक्ष रमेशचंद जैन ने बताया कि बुधवार सुबह समवशरण पर श्रीजी का पंचामृत अभिषेक, शांतिधारा और नित्य नियम पूजा होगी उपाध्याय मुनि उदारसागरजी के आशीर्वचन होंगे। दोपहर 1 से शाम 4 बजे तक कल्पद्रुम महामंडल विधान का पूजन, 4 से 5 बजे उपाध्याय 108 श्री उदार सागरजी महाराज, उपशांत सागरजी महाराज, उत्कर्ष सागरजी महाराज का मंगल प्रवचन, शाम 7.30 बजे संगीतमय महाआरती, 8 बजे शास्त्रवाचन प्रतिष्ठाचार्य वाणी भूषण पंडित ऋषभ कुमार जैन द्वारा किया जाएगा। 8.30 बजे सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।

इन्होंने लिया धर्मलाभ

इंद्रोंके जोड़ों सहित पांडाल में बैठकर विधान की पूजा कुबेर का लाभ राजेश भाई, नीलेश डेंडू ने लिया। शांतिधारा लक्ष्मीचंद/भेरजी जैन समवशरण पर अभिषेक का लाभ भावेश/गोवर्धनलाल कनबा, मगनलाल धताणा, निरंजनलाल/उदयलाल, नटवरलाल जैन ओड़ा वालों ने लिया। राजा श्रेणी लाभ हीरालाल ने लिया। 4 से 5 बजे उपाध्याय 10