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हरित राजस्थान के नाम पर \"हरित\' घोटाला

7 वर्ष पहले
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बांसवाड़ा िजले में पौधे और उन पर खर्च हुए रुपए की वस्तुस्थिति

2009-10 : 28लाख 37 हजार 800 पौधे लगाए। इसमें से 23 लाख 66 हजार पौधे जीवित होने का दावा, इन पौधों पर 3 करोड़ 17 लाख रुपए खर्च हुए।

2010-11: 28 लाख52 हजार पौधे लगाए गए। इसमें से 23 लाख 61 हजार 900 पौधे जीवित होना बताया, खर्च में 3 करोड़ 37 लाख रुपए की राशि हुई।

2011-12: 26लाख 13 हजार 453 पौधे लगाए गए। इसमें से 23 लाख 33 हजार पौधे जीवित होना बताया। इस पर 37 लाख रुपए की खर्च होने हुए।

भास्कर न्यूज|बांसवाड़ा

हरितराजस्थान योजना में ही हरित घोटाला हो गया है। पूर्व कांग्रेस सरकार के कार्यकाल के दौरान महात्मा गांधी मनरेगा में हरित राजस्थान योजना प्रारंभ की थी। जिसमें प्रतिवर्ष वर्षा ऋतु में लाखों की मात्रा में पौधे लगाने की स्कीम थी। पिछले तीन सालों में राजस्थान के बांसवाड़ा, डूंगरपुर और प्रतापगढ़ में 1 करोड़ 58 लाख पौधे लगाने का दावा इस योजना के तहत किया गया है। इस पर 20 करोड़ रुपए खर्च किए हैं। मौके पर 20 प्रतिशत पौधे भी जीवित नहीं है। सरकारी आंकड़ों और बजट के बीच अंतर को समायोजित कर पौधों को लेकर जिला परिषद की ओर से जमकर फर्जीवाड़ा किया गया। बाद में पौधों की सुरक्षा को लेकर कोई भी इंतजाम सामने नहीं आए। इसके चलते करोड़ों रुपए की राशि का जहां दुरुपयोग हुआ है, वहीं फर्जीवाड़ा करते हुए आंकड़ों में 75 प्रतिशत पौधे जीवित होना बताया गया है। जो एक तरह से हरित राजस्थान योजना में ही हरित घोटाला है।

इस पूरे मामले का खुलासा सूचना के अधिकार कानून के तहत ग्रामीण विकास और पंचायतीराज से मांगी गई सूचनाओं के आधार पर हुआ। यह सूचनाएं पीपुल फॉर एनीमल्स के प्रदेश प्रभारी बाबूलाल जाजू ने मांगी थी। जिसका खुलासा जाजू ने एक दिवसीय बांसवाड़ा दौरे पर आए रविवार को किया।

विश्वरिकॉर्ड तो बनाया, बाद में क्या हुआ, सबने देखा : डूंगरपुरजिले में खेमारू नाम की वजह पर विश्व रिकॉर्ड बनाने के लिए करीब पांच साल पहले 6 करोड़ पौधे रोपे गए थे, आज वहां पर 6 हजार पौधे भी नजर नहीं आएंगे। वन विभाग, ग्रामीण विकास और अन्य अफसरों ने मिलकर करोड़ों रुपए के बजट का बंदरबांट हरित राजस्थान योजना के तहत किया है। हालात यह है कि एक भी पौधे के चारों ओर ट्री गार्ड नहीं लगे हुए है। बीच में सरकार ने एक सर्कुलर जारी कर कहा था कि अब कोई भी अफसर यह नहीं कह प