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2 कॉलेजों के 5973 हजार छात्र-छात्राओं की सवा करोड़ रुपए की छात्रवृत्ति ठेके में उलझी

4 वर्ष पहले
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सूत्रों की मानें तो इसके पीछे की कहानी यह है कि कॉलेज ने साल 2015-16 के ही कई आवेदन अब तक विभाग को ओके करके नहीं भेजे गए हैं। कथित ठेकेदार का कहना है कि कई आवेदन में गड़बड़ी थी। छात्र-छात्रा उसे अपडेट करेंगे, तब उसे पोर्टल पर ओके किया जा सकेगा। ऐसे में तब का ही काम पूरा नहीं हुआ है और उसे भुगतान नहीं किया जा सका है। एक रोचक बात यह है कि साल 2015-16 में क्रॉस चैक करने के लिए किसी फर्म को ठेका दिया ही नहीं गया था। ठेकेदार ने बताया कि उसे केवल कॉलेज से मुंहजुबानी कह दिया गया था कि काम उसे करना है। ठेकेदार ने बताया कि साल 2016-17 का काम उसे दिया ही नहीं गया। साल 2015-16 में ठेकेदार ने जो काम किया, उसका भुगतान उसे करना इसलिए संभव नहीं है क्योंकि टेंडर या कॉटेशन लिए ही नहीं गए। ऐसे में साफ है कि एसबीपी कॉलेज प्रशासन की गंभीर लापरवाही के कारण अब तक आवेदन जांचने की प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। छात्र रोजाना आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन पूरा मामला अब सामने आने से साफ है कि अगले कम से कम एक माह तक भुगतान नहीं हो सकेगा। इसकी वजह यह है कि अब नए सिरे से टेंडर प्रक्रिया करनी पड़ेगी। इसके बाद उसी फर्म को वर्कऑर्डर दिया जा सकेगा, भुगतान भी तभी संभव है।

छात्रसंघ के नेतृत्व में एसबीपी कॉलेज पहुंचे छात्र प्राचार्य से चर्चा करते हुए।

आंकड़ों पर एक नजर

एसबीपीकॉलेज

{4हजार 906 छात्र-छात्राओं के 92 लाख 84 हजार 310 रु.

कारण:कथित ठेकेदार ने नहीं की फीडिंग

वीकेबीकॉलेज

{1067छात्राओं के 19 लाख 80 हजार 582 रु.

कारण: पॉर्टलपर एरर से अटकी प्रक्रिया

भास्कर संवाददाता| डूंगरपुर

जिलेके दोनों बड़े सरकारी कॉलेज के पिछले साल की 1 करोड़ 12 लाख 64 हजार 892 रुपए की छात्रवृत्ति रुक गई है। कॉलेज स्तर पर ही ऑनलाइन आवेदन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से यह संकट खड़ा है। छात्र-छात्राएं कॉलेज और कंप्यूटर सेंटर के चक्कर लगा रहे हैं। एसबीपी कॉलेज छात्रसंघ अध्यक्ष उमेश मीणा और विनायक भगोरा शुक्रवार को सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग में समर्थकों के साथ पहुंचे तो वहां सारा माजरा उल्टा ही निकला।

कॉलेज स्तर पर ही 4 हजार 906 छात्रों की छात्रवृत्ति की प्रक्रिया नहीं होने का खुलासा हो गया। साथ ही वीकेबी गर्ल्स कॉलेज की भी 1067 की छात्राओं के साथ यही परेशानी सामने आई। मामले में कभी कॉलेज विभाग पर ठीकरा फोड़ रहे हैं। वहीं असल में कॉलेज की प्रक्रिया ही इतनी ढीली रही कि अप्रैल में आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के ढाई बाद भी खातों में छात्रवृत्ति की राशि जमा नहीं हुई। छात्रसंघ अध्यक्ष ने वहां ज्ञापन दिया, इसके बाद जानकारी लेकर सभी एसबीपी कॉलेज प्राचार्य डॉ. सीके. जैन से मिले।

उन्हें बताया कि गुरुवार को गलत जानकारी दी गई थी कि सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से छात्रवृत्ति देने में देरी हो रही है। अब वहां से मिली अधिकृत जानकारी के अनुसार कॉलेज की लापरवाही रही है। प्राचार्य ने फोन पर कथित ठेकेदार से फोन पर चर्चा की। ठेकेदार ने बताया कि काम यहीं से रुका हुआ है और उसे करना भी नहीं है। ठेकेदार के इस रवैए से अब साल 2016-17 की छात्रवृत्ति के लिए ऑनलाइन फीडिंग की प्रक्रिया शुरू करने के हालात कॉलेज के सामने खड़े हो गए हैं।

दोनोंकॉलेज की कहानी कुछ इस तरह

एसबीपीकॉलेज : ठिकानानहीं कि कौन करेगा चेक। आवेदन की प्रक्रिया अप्रैल में पूरी हुई। अब तक यही तय नहीं है कि छात्र-छात्राओं के आवेदन संबंधित विभाग के पोर्टल पर ऑनलाइन चैक करेगा।

वीकेबीकॉलेज : यहांठेका तो ठीक से हुआ। फिर भी ऑनलाइन चैक करने का काम अब तक नहीं हो सका। इसकी वजह यह बताई जा रही है कि संबंधित विभाग के पॉर्टल में गड़बड़ी है। इस कारण डाटा अपडेट नहीं हो सका है।

^मैंने हाल ही में ज्वॉइन किया है। पिछले साल के लिए ऑनलाइन प्रक्रिया अब तक हो चुकी होगी, यही जानकारी थी। अब पूरा मामला सामने आया है कि टेंडर ही नहीं हुए हैं, ऐसे में किसी फर्म ने काम नहीं किया। अब काम को शीघ्र पूरा कराने के प्रयास होंगे। -डॉ. सीके. जैन, प्राचार्य

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