15 करोड़ के प्लॉट को सीज करने की तैयारी में परिषद
गेपसागरझील से लगते क्षेत्रों में हो रहे निर्माण कार्यों पर तलवार लटक गई है। हाल ही में एक बड़े कॉमर्शियल भवन को नगर परिषद सीज करने की तैयारी कर रही है, जिसके प्लॉट की बाजार कीमत करीब 15 करोड़ रुपए है।
गेपसागर झील के पेटे में शास्त्री कॉलोनी, कुम्हारवाड़ा, एसीबी ऑफिस के लिए आरक्षित जमीनों के नीचे की ओर जमकर निर्माण हो रहे हैं। साल 2006 की बाढ़ में डूब चुके क्षेत्र को निर्माण निषेध घोषित कर रखा है। यहां आसपास के गांवों के कुछ भूमाफिया दलालों ने भरावकर जमीनों को तालाब से ऊंचा कर दिया है। ऐसे में अब तालाब की जमीन पर जमकर निर्माण किए जा रहे हैं। खासबात यह है कि तालाब की ये जमीनें भू माफियाओं ने अपने नाम तक दर्ज करा ली है। सभापति ने पूरे क्षेत्र का सर्वे शुरू कराया है, जिससे तालाब को मूलस्वरूप में लाया जा सके। अब एक के बाद एक निर्माण को चिन्हित किया जा रहा है, जो डूब क्षेत्र में थे। ऐसे क्षेत्र में निर्माण के लिए जलसंसाधन विभाग की एनओसी लेना जरूरी था।
बांसवाड़ा-डूंगरपुर मुख्य रोड पर तालाब से लगी भूमि पर 2 सालों से बन रहा कॉमर्शिलय भवन अब इस दायरे में गया है। पूर्ववर्ती बोर्ड ने निर्माण कई बार रुकवाया था। इस स्थल से निर्माण सामग्री भी अतिक्रमण निरोधक टीम जब्त कर चुकी है। इसके बाद भी निर्माण नहीं रुक रहा। प्लॉट के कथित मालिक नरेश दर्जी को परिषद की ओर से नोटिस भेजा जाने के बाद भी जलसंसाधन विभाग की एनओसी नहीं दी गई है। साथ ही कॉमर्शियल कन्वर्शन निर्माण स्वीकृति के अभाव में इस भवन को अवैध घोषित करते हुए सीज किया जा सकता है। इसके लिए पुलिसबल की डिमांड की जा रही है।
भवन जब्त करने के बाद इस पर परिषद ताला लगाएगी। बताया जा रहा है कि इन दिनों गेपसागर की रिंग रोड से लगे क्षेत्र में रोक और बिना निर्माण स्वीकृति के बाद पानवाड़ी, कुम्हारवाड़ा, बोहरावाड़ी में निर्माण शुरू हो गए हैं। इन्हें भी कार्रवाई की जद में लाया जा रहा है। इधर, रीको इंडस्ट्रियल के ठीक बाहर बनी आवासी कॉलोनी में भी अवैध निर्माण सामने आया है, जिसे नगर परिषद जब्त करने में जुटी है।
^कईगलत निर्माणों के कारण तालाबों को नुकसान हो रहा है। हम ऐसे सभी निर्माण चिन्हित करते हुए उन्हें परिषद की संपत्ति घोषित कराएंगे। ऐसी जगह नगर परिषद का बोर्ड भी लगाया जाएगा। दो दिन अवकाश होने से सीजिंग कार्रवाई में देरी हो रही है, मंगलवार तक इस पर अमल हो सकेगा। केकेगुप्ता, सभापति