श्रद्धा के साथ करें भगवान की भक्ति
शहरके न्यू कॉलोनी में चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान के छठे दिन गुरुवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि उदार सागर महाराज ने कहां कि गृहस्थ जीवन में श्रावक अपना कार्य पूर्ण करने में प्रथम प्राथमिकता देता है जबकि पूजा और भगवान के दर्शन को विराम दे देता है। राजा भरत ने कभी ऐसा नहीं किया। गृहस्थ जीवन का सबसे पूजा अनुष्ठान वहीं है जो प्रतिदिन देवदर्शन, पूजा अर्चना कर लेता है। पूजा करने से चित्त पवित्र होता है।
पाप कर्म दूर हो जाते है। व्यक्ति यदि श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान को यदि फूल की एक पंखुड़ी चढ़ा दें तो भी नि:संकोच उसका जीवन सफल और फलदायक होता है। यदि व्यक्ति के मनमंदिर में श्रद्धा हो, भाव हो तो पूजा का महत्व और बढ़ जाता है। प्रवक्ता भरत नागदा ने बताया कि भव्य कल्पद्रुम महामंडल विधान के तहत भरतचक्रवर्ती नवीन/वखेचंद, स्वधर्मइंद्र का लाभ नटवरलाल/लीलाचंद जैन ओड़ा वाले, महायज्ञ नायक इंद्र का लाभ राजेंद्र कोठारी ने लिया। इन्होंने 22 फीट ऊंचे समवशरण पर बैठकर पूजा अर्चना की उनके साथ इंद्रों के जोड़ों सहित पांडाल में बैठकर विधान की पूजा की। कुबेर का लाभअभयकुमार/शांतिलाल, समवशरण पर अभिषेक का लाभ रूपलाल घांटिया, रजनीश सींघई घड़ा कोटा, राकेशकुमार घडा खोरा, मुकेश कुमार कमलकुमार, शान्तिधारा का लाभ मुकेश कुमार और श्रेणिक का लाभ तोरावत सोहनलाल/मगनलाल जैन ने लिया। भोजनशाला में हमीरीबाई/मणीलाल की व्यवस्था रही। पादप्रक्षालन का लाभ विनोदकुमार छाणी ने लिया। इस दौरान कई समाजबंधु मौजूद थे।
डूंगरपुर. न्यू काॅलोनी में गुरुवार को आयोजित धार्मिक अनुष्ठान में उपस्थित श्रद्धालु।
डूंगरपुर. न्यू कॉलोनी में चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान की पूजा करते श्रद्धालु। इस दौरान कई समाजबंधु मौजूद थे।