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रिटायर्ड को संविदा पर लगाकर चल रही थी ऊपरी कमाई

7 वर्ष पहले
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डूंगरपुर नगरपरिषद में भ्रष्टाचार का एक मसला उजागर हुआ है, जबकि ऐसे कई दबे हो सकते हैं। रिटायर्ड को संविदा पर लगाकर ऊपरी कमाई की जा रही थी, लेकिन बाबू धरा गया। पूरे दफ्तर में 33 फीसदी पद खाली चल रहे हैं। रिक्त पदों पर परिषद के ही रिटायर्ड कर्मचारी को लगाकर काम चलाना भारी पड़ गया है। कनिष्ठ लिपिकों के दो पदों पर लगाए गए संविदाकर्मी पहले भी परिषद के कर्मचारी रह चुके हैं। रिटायरमेंट के बाद परिषद के कामकाज से पूरी तरह वाकिफ होने पर उन्हें अपनी मोटी कमाई जाती दिखी तो किसी तरह बैक डोर एंट्री लेकर संविदा पर फिर से काम संभाल लिया। बुधवार को एंटी करप्शन ब्यूरो द्वारा पकड़े गए संविदाकर्मी महेंद्रसिंह को स्पेशल कोर्ट ने जेल भेज दिया है। इधर, नगर परिषद कैंपस में कमिश्नर ने उनकी सेवाएं समाप्त कर दी।

उल्लेखनीय है कि मार्च में रिटायरमेंट के बाद से वे संविदा पर उसी कुर्सी पर बैठने में सफल हो गए थे, जहां से भवन निर्माण संबंधित स्वीकृतियां जारी होती है। एक फाइल के 10 से 15 हजार रुपए लेने की बात सामने आने के बाद से अब यह भी चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर ये फाइलें किस-किस टेबल से गुजरती थी और इस रकम में कौन-कौन कितने फीसदी का हिस्सेदार था। पूर्व में नगर परिषद कमिश्नर का अतिरिक्त चार्ज देख रहे तत्कालीन एसडीओ ने उनकी कार्यप्रणाली से नाराज होकर सेवाएं समाप्त करने को कहा था, लेकिन सरकार आपके द्वार कार्यक्रम सिर पर होने से यह मुमकिन नहीं हो सका और इसी बीच नए कमिश्नर ने कामकाज संभाल लिया।