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शुद्ध मन से भक्ति करने की सीख

7 वर्ष पहले
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डूंगरपुर| मुनिउदार सागर महाराज के सानिध्य में चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान के पांचवें दिन बुधवार को विविध धार्मिक आयोजन हुए। इस दौरान मुनि ने धर्मसभा को संबोधित करते हुए कहा कि भक्ति किसी भी भाषा में हो सकती है। भाषा पर कोई प्रतिबंध नहीं है। भक्ति शुद्ध मन और भावना से की जाए तो उसमें सफलता प्राप्त होती है। भक्ति के साथ भावों की प्रधानता रहती है। कई व्यक्ति धर्म के प्रति उदासीन रहते हैं। इसका कारण उनमें संतोष नहीं है। वे आलस्य प्रमाद को धारण करके बैठे हैं। अज्ञानतावश धर्म के प्रति आस्था कम होती जा रही है। यदि श्रद्धा से भगवान की भक्ति और दर्शन किए जाए तो वह फलदायक होता है।

प्रवक्ता भरत नागदा ने बताया कि विधान के कार्यक्रम में विधान के पांचवें दिन कल्पद्रुम महामंडल विधान का पूजन किया गया, जिसमें भरत चक्रवर्ती विनोदकुमार छाणी वाले, स्वधर्म इंद्र का लाभ गणेशलाल और महायज्ञ नायक इंद्र का लाभ जीवराज धताणा वालों ने लिया, जिन्होंने 22 फिट ऊंचे समवशरण पर बैठकर पूजा की। कुबेर का लाभ कल्याण सागर/पन्नालाल वोरा ने लिया। समवशरण पर अभिषेक का लाभ सतीश भूखिया, गजेंद्र कुमार आंतरी वाले, अंजनादेवी/दीपक खेतावत सलूंबर, पवनकुमार कासलीवाल ने लिया। राजा श्रेणिक का लाभ धनपाल/पन्नालाल वोरा ने लिया। मुनि के पादप्रक्षालन का लाभ प्रकाशचंद्र साबलमेडा ने लिया। महाआरती का लाभ राजेश जैन परिवार ने लिया। शास्त्रवाचन प्रतिष्ठाचार्य पं. ऋषभकुमार जैन ने किया। कार्यक्रम में महामंत्री गजेंद्र जैन, सुदर्शन जैन, भूपेंद्र गांधी, सोहनलाल तोरावत, नवीन पाटनशाह, रविभाई मौजूद थे।

डूंगरपुर. कल्पद्रुम महामंडल विधान के तहत पूजा में भाग लेते श्रद्धालु।

डूंगरपुर. कल्पद्रुम महामंडल विधान के तहत आयोजित धार्मिक कार्यक्रम में अर्घ्य समर्पित करते श्रद्धालु।