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सरकार बेपरवाह, विभाग असहाय छात्र कह रहे संस्कृत को बाय-बाय

Dungarpur News - सरकारकी अनदेखी की वजह से प्रदेश में संस्कृत स्कूलों के साथ संस्कृत कॉलेजों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस...

Dainik Bhaskar

Jul 09, 2016, 03:40 AM IST
सरकार बेपरवाह, विभाग असहाय छात्र कह रहे संस्कृत को बाय-बाय
सरकारकी अनदेखी की वजह से प्रदेश में संस्कृत स्कूलों के साथ संस्कृत कॉलेजों की स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है। इस बार उदयपुर के महाराणा पीजी कॉलेज में आचार्य (स्नातकोत्तर) में कुल 160 सीटों में सभी सीटें खाली रह गईं। इतना ही नहीं, शास्त्री (स्नातक) की 240 सीटों में से 33 सीटें ही भर पाई हैं। शास्त्री में वैध विषय में 0, साहित्य में 25 व्याकरण विषय में 8 ही प्रवेश हुए हैं। संस्कृत शिक्षा में ऐसी स्थिति पहली बार बनी है जब सत्र शुरू होने के बावजूद आधी से ज्यादा सीटों पर प्रवेश ही नहीं हो पाए। सिर्फ उदयपुर में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के अन्य संस्कृत कॉलेजों में भी यही हाल हैं। जयपुर में प्रदेश के इकलौते जगदगुरु रामानंदाचार्य राजस्थान संस्कृत विश्वविद्यालय में शास्त्री और आचार्य में कुल 560 सीटों में से 60 सीटों पर ही प्रवेश हो पाए हैं।

^संस्कृत कॉलेज में इस बार प्रवेश बहुत कम हुए हैं। उदयपुर कॉलेज में आचार्य शास्त्री में प्रवेश लेने वाले छात्रों की संख्या पिछले सालों में घटी है। हमने इस संबंध में विभाग मुख्यालय को अवगत करा दिया है। भगवतीशंकर व्यास, संभागीय शिक्षा अधिकारी, संस्कृत शिक्षा

^राज्य सरकार का संस्कृत शिक्षा के प्रति बिल्कुल ध्यान नहीं है। सरकार की अनदेखी का दंश संस्कृत शिक्षा झेल रही है। यही स्थिति रही तो आने वाले समय में संस्कृत स्कूल के साथ इन कॉलेजों पर भी ताले लग जाएंगे। सरकार को संस्कृत शिक्षकों की भर्ती करनी चाहिए। अभयसिंहराठौड़, प्रदेश प्रतिनिधि, शिक्षक संघ राष्ट्रीय

सीटें नहीं भरीं तो बढ़ाई अंतिम तिथि

प्रदेशमें करीब 90 प्रतिशत सीटें खाली रहने के कारण अंतिम तिथि 25 जून से बढ़ाकर 11 जुलाई कर दी है जबकि एक जुलाई से सत्र की शुरुआत होनी थी। विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि तिथि बढ़ाने से कुछ और सीटें भर जाएंगी।

उदयपुर: शास्त्री में 120 में से 20 सीटों पर प्रवेश और आचार्य में सभी 160 सीटें खाली हैं। यहां प्रिंसिपल के अलावा 4 लेक्चरर हैं इनमें से एक लेक्चरर सितम्बर में सेवानिवृत होंगे।

नाथद्वारा (राजसमंद): शास्त्री में 120 में से 20 सीटों पर प्रवेश हुए हैं यहां एक प्रिंसिपल के अलावा 3 लेक्चरर हैं।

गनोड़ा (बांसवाड़ा): शास्त्री में कुल 240 में 175 और आचार्य में 240 में से 150 प्रवेश हुए। यहां प्रिंसिपल के अलावा 1 प्रोफेसर 1 लेक्चरर हैं।

डूंगरपुर: यहां के कॉलेज की स्थिति संतुष्ट-जनक हैं। शास्त्री की 80 सीट में से 70 में प्रवेश हुए। यहां प्रिंसिपल के अलावा स्टाफ में मात्र 1 लेक्चरर है।

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