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जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए बनेगी नीति, अनुदान के होंगे प्रावधान

5 वर्ष पहले
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खेतीमें बढ़ते रासायनिक खाद और दवाओं के इस्तेमाल को रोकने और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार जैविक खेती नीति लाने जा रही है। जैविक खेती को प्रोत्साहित करने के लिए जैविक प्रमाणीकरण संस्था पहले से कार्यरत है, लेकिन इसे वृहद रूप देने के लिए सरकार ने नीति ही लागू करने का फैसला किया है। नीति का प्रारूप तैयार हो चुका है, केबिनेट की मंजूरी के बाद इसे जारी किया जाएगा। इसके बाद किसानों को इस ओर आकर्षित करने के लिए सिर्फ बड़े स्तर पर कार्यक्रम होंगे, बल्कि किसानों को सहायता के रूप में राशि भी उपलब्ध कराई जाएगी। जैविक खेती की नीति जिलेवार लागू करने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए कार्यक्रम तय किया जाएगा और किसानों को प्रशिक्षित करने के लिए भी कार्यक्रम चलाए जाएंगे। हालांकि अभी परीक्षण के तौर पर डूंगरपुर जिले में जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए पूरे जिले को ही जैविक घोषित किया हुआ है। कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी ने बताया कि अभी राज्य में 4040 किसान जैविक खेती प्रक्रिया से जुड़े हैं। ये 17,233 हैक्टेयर क्षेत्रफल के साथ जैविक प्रमाणीकरण संस्था से जुड़े हैं। इनमें से संस्था की ओर से 10,748 हैक्टेयर के लिए जैविक प्रमाण पत्र जारी किया हुआ है।

सहायता राशि मिलेगी : कृषिमंत्री ने बताया कि 50 हैक्टेयर तक की जमीन पर जैविक खेती करने वाले किसान या किसानों के समूह को परंपरागत खेती योजना में 20 हजार रुपए प्रति हैक्टेयर के हिसाब से सहायता दी जाएगी। इसी प्रकार राष्ट्रीय बागवानी मिशन में तीन किस्तों में तीन साल में 10 हजार रुपए की राशि भी दी जाएगी।

नीतिआने से किसानों को होगा ज्यादा फायदा : कृषिमंत्री के अनुसार जैविक नीति आने के बाद किसानों को और अधिक फायदा होगा। उन्होंने बताया कि नीति में जैविक खेती किसे मानेंगे, कौनसा बीज इस्तेमाल करना होगा, कीटनाशक कौन सा ले सकेंगे या जैविक कैसे तैयार करेंगे और खाद कैसी इस्तेमाल की जा सकेगी, इनकी जानकारी शामिल करेंगे।

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