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हमारे यहां भारत का पहला स्थानीय स्वामित्व वाला सौर पैनल निर्माण संयंत्र, नाम रखा दुर्गा

भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर जिलाअब विकास के नवीन आयाम स्थापित करता जा रहा है। इसी का ताजा उदाहरण गुरुवार को 68वें...

Dainik Bhaskar

Jan 28, 2017, 04:05 AM IST
हमारे यहां भारत का पहला स्थानीय स्वामित्व वाला सौर पैनल निर्माण संयंत्र, नाम रखा दुर्गा
भास्कर संवाददाता | डूंगरपुर

जिलाअब विकास के नवीन आयाम स्थापित करता जा रहा है। इसी का ताजा उदाहरण गुरुवार को 68वें गणतंत्र दिवस पर दिखा जब डूंगरपुर में महिला सशक्तिकरण की अनूठी इबारत लिखते हुए भारत में पहली बार जनजाति क्षेत्र की महिलाओं के स्वामित्व वाले सौर पैनल निर्माण संयत्र ‘दुर्गा’ की आधारशिला रखी गई। आदिवासी अंचल की महिला इंजीनियर्स का यह ‘दुर्गा अवतार’ अब डूंगरपुर में ही 1 वॉट से लेकर 300 वॉट तक के सोलर पैनल का निर्माण करेगा। इस प्लांट के निर्माण पर करीब 1 रोड़ रुपए खर्च होंगे।

जिला प्रशासन-डूंगरपुर की पहल पर राजीविका (राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद) के क्लस्टर स्तर महासंघों (सीएलएफ) के साथ साझेदारी राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास निगम के तत्वावधान में सोलर लेंप निर्माण परियोजना के सफल होने के बाद अब महिला स्वामित्व वाले सोलर मॉड्यूल मेनुफेक्चरिंग प्लांट ‘दुर्गा’ (डूंगरपुर रिन्युएबल एनर्जी जनरेटिंग एसोसिएशन) के शिलान्यास समारोह के मुख्य अतिथि राज्यमंत्री सुशील कटारा थे। राज्यसभा सांसद हर्षवर्धन सिंह, विधायक देवेन्द्र कटारा, जिला प्रमुख माधवलाल वरहात, नगरपरिषद सभापति केके गुप्ता ने सभा को संबोधित किया। भाजपा जिलाध्यक्ष वेलजी पाटीदार, पंचायत ग्रामीण राज विकास सचिव एवं राजीविका निदेशक राजीव सिंह ठाकुर, सीईओ आशीष गुप्ता और मुंबई आईआईटी के प्रोफेसर चेतन सोलंकी सहित मौजूद रहे।

जनजाति क्षेत्र की महिलाओं ने सिर्फ 6 माह में ही 40 हजार सोलर लैंप बेच कर करीब 80 लाख रुपए का व्यापार खड़ा कर दिया। सोलर लैंप निर्माण से स्वयं सहायता समूह की महिलाओं ने करीब 32 लाख रुपए कमाए। अब इसी कमाई से डूंगरपुर शहर में सोलर मॉड्यूल मेन्यूफेक्चरिंग प्लांट खोला जाएगा। इस प्लांट का संचालन भी महिलाओं के हाथों में रहेगा। शुरूआत में करीब 30 महिलाओं को सीधा रोजगार मिलेगा। कौशल विकास और आजीविका मिशन के तहत डूंगरपुर जिले में सोलर लैंप बनाने के लिए जिला प्रशासन और आईआईटी मुंबई के बीच 11 मई 2016 में एमएओयू हुआ था। इसके बाद 23 मई 2016 को स्वयं सहायता से जुड़ी महिलाओं लैंप बनाना शुरू कर दिया था। शुरूआत में स्वयं सहायता से जुड़ी 150 महिलाओं को आईआईटी मुंबई को ओर से ट्रेनिंग दी गई थी। जिसके बाद करीब 500 महिलाएं इसके लैंप वितरण से जुड़ गई थी।

यह होगा प्लांट में

इसप्लांट में 1 वॉट से लेकर 300 वॉट तक के सोलर उपकरण तैयार किए जाएंगे। साल में करीब2 मेघावाट के उत्पादन का लक्ष्य इस यूनिट से रखा गया है। इसके संचालन का जिम्मा आईआईटी मुंबई का रहेगा। यूनिट को महिलाएं चलाएंगी जबकि उन्हें सहयोग आईआईटी मुंबई की टीम करेगी।

यहहै योजना

मुंबईआईआईटी की टीम आदिवासी क्षेत्रों में सोलर लैंप बनाने के काम में जुटी हुई। शुरूआत में यह टीम राजस्थान के डूंगरपुर जिले सहित महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उड़ीसा के करीब 32 जिलों में काम कर रही है और अब तक एक साल में 10 लाख सोलर लैंप बना कर बच्चों तक पहुंचा दिए गए है। दूसरे चरण में 2 साल में 70 लाख लैंप तैयार करना है। भारत सरकार के सहयोग से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम में असम, उड़ीसा, झारखंड, बिहार और यूपी को भी जोड़ा जा रहा है। मुंबई आईआईटी इससे पूर्व एक साल में 10 लाख सोलर लैंप तैयार कर वितरण कर चुकी है। यह बड़ा फेज है जिसमें 2 साल में ही 70 लाख लैंप तैयार करने है।

सौर पैनल की आधारशिला रखते जनप्रतिनिधि और प्रशासनिक अधिकारी।

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