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बेटियों की आत्मरक्षा के लिए भामाशाह की तलाश

7 वर्ष पहले
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बेटियोंको आत्मरक्षा गुर सिखाना विभाग के लिए चुनौती बनकर रह गया है। राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा परिषद ने बेटियों को मिलने वाले प्रशिक्षण के बजट में कटौती कर दी है। ऐसे में प्रशिक्षण शिविर कराने के लिए विभाग के अफसरों को पसीने छूट रहे है।

अब ये शिविर लगाने के लिए भामाशाहों की तलाश की जा रही है। विभाग की ओर से शिविर के लिए 10 हजार रुपए का बजट दिया जाता था। लेकिन इसे कम करते हुए तीन हजार प्रति शिविर कर दिया है। इसमें ढ़ाई हजार रुपए प्रशिक्षण मानदेय 500 रुपए शारीरिक शिक्षक के यात्रा भत्ता के रूप में देने के आदेश दिए हैं। अन्य सभी खर्चों में भामाशाह का सहयोग लेना है। विभाग ने बालिकाओं के पौष्टिक नाश्ते के लिए किसी भी तरह की राशि स्वीकृत नहीं की है। उल्लेखनीय है कि सरकार ने पिछले साल छात्राओं को असामाजिक तत्वों से निपटने के गुर सिखाने की योजना बनाई।

प्रशिक्षणमें सिखाए जाएंगे आत्मरक्षा के गुर

प्रशिक्षणमें बालिकाओं को आत्मरक्षा के गुर सिखाए जाते हैं। पिछले साल ही राज्य सरकार की ओर से ऐसे प्रशिक्षण शिविर लगाने का निर्णय लिया गया था। प्रशिक्षित महिला शारीरिक शिक्षक बालिकाओं को जूडो-कराटे, जिम्नास्टिक आदि गतिविधियों सिखाएंगी।

शिविर में नवनियुक्त इन विषयों की जानकार शारीरिक शिक्षक को प्राथमिकता दी जाती हैं। शिविर फरवरी तक ही ये सभी शिविर लगाकर बालिकाओं को प्रशिक्षित किया जाना हैं। शिविर में नवीं से 12 वीं तक की सौ बालिकाएं शामिल होगी। इससे इन बालिकाअों मंे आत्मबल मिलेगा और बालिकाओ का साहस भी बढ़ेगा।