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रेलवे के एक साल से चल रहे काम की अब वसूलेंगे रॉयल्टी
जिलेमें पिछले एक साल से चल रहे रेलवे के काम पर खनिज विभाग की नजर अब जाकर पड़ी है। खनिज विभाग के माइनिंग इंजीनियर की मानें तो अब विभाग रेलवे ठेकेदार से रॉयल्टी वसूल करेगा। यदि ऐसा होता है तो विभाग को लाखों रुपए राजस्व के रूप में प्राप्त होंगे। वहीं, दूसरी ओर इस पूरे मामले में माइनिंग विभाग और रेलवे अधिकारियों की लापरवाही भी सामने आई है कि माइनिंग विभाग की परमिशन लिए बिना ही रेलवे ठेकेदार अपना काम कर रहा था।
पिछले दिनों माइनिंग विभाग में नए एमई गोवर्धनराम की ज्वाइनिंग के बाद अवैध खनन को लेकर जिले में कार्रवाई में तेज आई थी। इसी कार्रवाई के तहत रेलवे के चल रहे काम की भी जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि ठेकेदार बिना एसटीपी (शार्ट टर्म परमिट, कुछ समय की स्वीकृति) के ही काम कर रहा है। विभाग ने तब एक मशीन और तीन डंपर जब्त कर लिए थे। इसके बाद माइनिंग विभाग अब तक हुए कार्य पर रॉयल्टी वसूल करने की बात कर रहा है। एमई की मानें तो ठेकेदार की ओर से अब तक किए गए कार्यों के बिल रेलवे से मांगे जाएंगे। इसके बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
इधर, रेलवे अधिकारियों की मानें तो वह इस संबंध में उच्चाधिकारियों से चर्चा कर ही कुछ कदम उठाएंगे। जिले में डूंगरपुर-बांसवाड़ा-रतलाम रेल लाइन का काम चल रहा है। इसके तहत प्रथम चरण में 0 से 17 किमी तक काम हो रहा है। इस वर्क पर करीब 62 करोड़ रुपए खर्च होने हैं। जिसमें अर्थवर्क का काम प्रमुख है। डूंगरपुर में रेलवे का काम पिछले एक साल से चल रहा है, लेकिन माइनिंग विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई और रेलवे का काम ऐसे ही चल रहा था। नियमानुसार ऐसा कोई भी कार्य, जिसमें खनिज का उपयोग होना है उसमें खनिज विभाग से एसटीपी (शॉर्ट टर्म परमिट) लेनी आवश्यक होती है। माइनिंग विभाग की मानें तो रेलवे ठेकेदार ने ऐसी कोई परमिशन नहीं ली थी।
जुर्माना भी वसूलेंगे
^किसी भी प्रकार का काम जिसमें खनिज का उपयोग होता है उसके लिए माइनिंग विभाग से एसटीपी लेना आवश्यक है। रेलवे के पास माइनिंग विभाग की कोई परमिशन नहीं थी। रेलवे के तहत चल रहे कार्यों की रॉयल्टी वसूली जाएगी। यदि कहीं नियमों की पालना नहीं हुई है तो जुर्माना भी वसूला जाएगा।\\\'\\\' -गोवर्धनराम,एमई,खनन विभाग डूंगरपुर