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भगवान के दर्शन के लिए मन को उसके अनुरूप बनाए

7 वर्ष पहले
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न्यूकॉलोनी में चल रहे कल्पद्रुम महामंडल विधान के दौरान सोमवार को धर्मसभा को संबोधित करते हुए उदार सागर महाराज ने कहा कि जब तक हमारी भावना, मन भगवान के दर्शन करने योग्य नहीं बनता है तब तक दर्शन करना सार्थक नहीं होता है। दर्शन करने के लिए हमारे मन में दर्शन करने का भाव लाना चाहिए। मन को उसके अनुरूप बदलना पड़ता है, तब ही भगवान के दर्शन हो पाते है और जीवन सफल हो जाता है। साधु सेवा समिति के अध्यक्ष रमेशचंद जैन ने बताया कि भव्य कल्पद्रुम महामंडल विधान के कार्यक्रम में विधान के तीसरे दिन कल्पद्रुम महामंडल विधान का पूजन किया गया। जिसमें भरत चक्रवर्ती चंदूलाल कोठारी लोहारिया वाले, स्वधर्मइंद्र का लाभ नानालाल वोरा और महायज्ञ नायक इंद्र का लाभ धनपाल जैन ने लिया। जिन्होंने 22 फिट ऊंचे समवशरण पर बैठकर पूजा की। उनके साथ इंद्रों के जोड़ों सहित पांडाल में बैठकर विधान की पूजा की। कुबेर का लाभ गजेंद्र जैन ने लिया, शांतिधारा बसंतलाल/लक्ष्मीचंद वस्सी वाले और समवशरण पर अभिषेक का लाभ महावीर प्रसाद थाना, श्रीकांत वकील, यशवंतलाल, थाना, विनोद कुमार/मोतीलाल कतिसौर परिवार ने लिया। राजा श्रणोक का लाभ नाथूलाल ढलावत, समवशरण पर पादप्रक्षाल चिमनलाल जांगडा थाणा ने लिया और गुरुचरण का पाद प्रक्षालन का लाभ लक्ष्मीलालजी ने लिया। शाम को उदार सागर महाराज, उपशांत सागर महाराज, उत्कर्ष सागर महाराज का मंगल प्रवचन हुआ। इसके बाद महाआरती का लाभ महावीरप्रसाद थाना वालों ने लिया। शास्त्र वाचन प्रतिष्ठाचार्य त्रषभकुमारजी जैन ने किया। कार्यक्रम में सुदर्शन जैन, भूपेंद्र गांधी, सोहनलाल तोरावत, नवीन पाटन शाह, रवि शेठ मौजूद थे।

डूंगरपुर. न्यू कॉलोनी में जैन समाज की ओर से आयोजित कल्पद्रुम महामंडल विधान में सोमवार को आरती उतारते श्रद्धालु।

डूंगरपुर. न्यू कॉलोनी में जैन समाज की ओर से आयोजित कल्पद्रुम महामंडल विधान में विधान की पूजा करते श्रद्धालु।