चित्तौड़गढ़। फागुनी बयार की दस्तक के साथ ही खेतों में खड़ी गेहूं की फसलों ने सुनहरा रंग ओढ़ना शुरू कर दिया है। कहीं गेहूं की बालियां दूधियावस्था में हैं तो कहीं बालियां पकने में हैं। दो-तीन दिन से मौसम परिवर्तन के साथ ही यह क्रम गति पकड़ने लगा है।
होली नजदीक आते-आते फसल की कटाई शुरू हो जाएगी। किसान गेहूं की बंपर पैदावार को लेकर खुश नजर रहा है। ज्यादा बारिश, तेज ठंड मावठ से अफीम की फसल को भले ही नुकसान हुआ हो, लेकिन गेहूं की फसल को काफी फायदा हुआ है। वहीं सरसों, चना, जौ की बुवाई का रकबा दुगुना रहा है लंबी सर्द रातों के बीच मावठ की चादर बिछ जाने से नमी बराबर बनी रही। भरपूर वानस्पतिक बढ़वार के साथ ही पाला नाम मात्र का ही पड़ने से कीट बीमारियों का प्रकोप भी नहीं हुआ। इससे किसानों को गेहूं की रिकार्ड पैदावार नजर रही है।
कृषि अधिकारियों के अनुसार डूंगला क्षेत्र में गेहूं का उत्पादन उम्मीद से भी अधिक होने की पूरी संभावना है। कृषि विभाग का मानना है कि गत वर्ष की तुलना में पैदावार पांच से दस प्रतिशत तक बढ़ सकती है।
फैक्ट फाइल : डूंगला क्षेत्र
रबीकी बुवाई : 18,517हैक्टेयर
गेहूं: 6,250हैक्टेयर (पैदावार लक्ष्य 3450 किग्रा/हैक्टेयर) सरसों: 6,900हैक्टेयर ( पैदावार लक्ष्य 1850 किग्रा/हैक्टेयर)
इनके अलावा चना-810 हैक्टेयर, जौ-1050 है., इसबगोल-1045 है., लहसुन-405 है. मैथी-420 है., रजका-525 है., बरसीम-390 है., सब्जी-250 है., अफीम-87 है. अन्य फसलों की 400 हैक्टेयर बुवाई हुई।
काला सोना में रोग, लेेेकिन अच्छी पैदावार संभव
मावठपाला कम पड़ने से अन्य फसलों को फायदा हुआ है। हालांकि काला सोना कही जाने वाली अफीम की फसल में कुछ नुकसान देखा जा रहा है। काली मस्सी के रोग ने फसल की बढ़वार को रोका था, लेकिन किसानों की मेहनत समय पर दवा के छिड़काव ने रोग के प्रकोप पर काफी हद तक काबू पाया। यह रोग जिले के कई क्षेत्रों में देखा गया। फसलों में आवश्यक दवाओं के छिड़काव के निर्देशों के बाद विभाग के अधिकारियों का कहना है कि रोग पर काबू पा लिया गया है। इस बार डोडे भी बड़े आकार के हैं तथा उनमें दूध (लेटेक्स) की मात्रा भरपूर है। इससे इस बार भी अफीम फसल की पैदावार अच्छी होने की उम्मीद जगी है।
^डूंगला क्षेत्र में गत वर्ष की तुलना में बुवाई का रकबा भी बढ़ा है। साथ ही मौसम ने साथ दिया तो गत वर्ष की तुलना में पांच से दस प्रतिशत पैदावार बढ़ने का अनुमान है। अफीम की फसल में आए रोग की रोकथाम के लिए रेडोमिल का स्प्रे करवाया जा रहा है। मुकेशधाकड़, सहायक कृषि अधिकारी डूंगला।