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‘खतरों का सामना करे उसका जीवन सार्थक’

5 वर्ष पहले
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जो खतरे से कतराता है। मुंह मोड़ता है या पलायनवादी बनता है। वह कितनी ही कठोर साधना क्यों कर लें उसका धर्म में प्रवेश नहीं हो सकता। जो मन अपमान की परवाह नहीं करते हुए निस्वार्थ भाव से आने वाली चुनौतियों और खतरे को हंसते-हंसते स्वीकार करता है। खतरा ही धर्म का प्रवेश द्वार है। यह बात शनिवार को जैन संत कमलेश मुनि ने डूंगला से मंगलवाड़ आते समय बिलोदा में एक स्कूल में प्रवचन के दौरान कही।

उन्होंने ने कहा की विश्व में जितने भी महापुरूष हुए। उनको महान बनाने में खतरा ही वरदान बना है। जिनके जीवन में खतरा नहीं वह तो, जीवित मुर्दे के समान है। जो जितने बडे़ खतरे से खेलता है उतना ही महान बनता है। धन वैभव पद प्रतिष्ठा के सहारे या जाती के सहारे किसी को महान मानना नादानी है। उन्होंने कहा कि जो हमारे सामने खतरे और चुनौतियों को प्रस्तुत करता है, वही हमारे विकास में आॅक्सीजन से भी ज्यादा महत्वपूर्ण है। कमलेश मुनि ने शनिवार शाम मंगलवाड़ में प्रवेश किया कृष्ण महावीर गोशाला में गायों को हरी घास खिलाई, पानी पिलाया।

मंगलवाड़. बिलोदास्कूल में आयोजित कार्यक्रम में विद्यार्थी, जैन संत कमलमुनि अन्य।

चित्तौड़गढ़ . समुद्रपूरी दुनिया का जल ग्रहण करता है। संग्रहित करता है देता कुछ नहीं है। इसी प्रकार मनुष्य को संग्रह की वृति नहीं रख कर वितरण की भावना रखनी चाहिए। तभी समाज की विषमता का अंत हो सकता है। यह विचार श्रमण संघीय पश्चिम भारत प्रवर्तक रमेश मुनि के शिष्य सिद्धार्थ मुनि ने दिवाकर स्वाध्याय भवन सेंती में धर्मसभा को संबोधित करते हुए व्यक्त किए। उन्होंने ने कहा कि संसार में शमशान, समुद्र, अग्नि, पेट एवं इंसान की तृष्णा का कोई अंत नहीं होता है। यह हमेशा रिक्त रहती है। तृष्णा अनंत है। उन्होंने कहा कि सुख मनुष्य के भीतर है, लेकिन कस्तूरी मृग के समान हम बाहर ही भागते रहते है। दूसरों के सुख को देखकर दुखी होते रहते है। उन्होंने कहा कि श्रावक के बारह व्रतों में अतिथि संविभाग व्रत हमें यही शिक्षा देता है। धर्मसभा में लोकेश मुनि ने कहा कि यदि मनुष्य भ्रमर वृति धारण करने वाले अपनी आवश्यकताओं को सीमित कर ले तो सभी आर्थिक समस्याओं का अंत हो जाता है। उन्होंने कहा कि पूंजी से सहयोग कर निर्धन बच्चों को शिक्षा से सहायता प्रदान करें ताकि समाज का उत्थान हो। संघ अध्यक्ष लक्ष्मीलाल चंडालिया ने बताया कि रविवार को प्रवचन दिवाकर स्वाध्याय भवन में सुबह सवा नौ बजे से प्रवचन होंगे।

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