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गांवों में बस चलाने के लिए रोडवेज बना रहा नया रूट प्लान

7 वर्ष पहले
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राज्यसरकार के निर्देश पर बस सेवा से वंचित गांवों को रोडवेज से जोड़ने के लिए एक साल बाद फिर से ग्रामीण रूट बनाने की कवायद शुरू हो गई है। जल्द ही ग्रामीण रूट पर रोडवेज की बसों को चलाने के लिए डिपो में रूट परमिट पहुंच जाएगा। इसके बाद ग्रामीण क्षेत्रों को रोडवेज की बसों से जोड़ा जाएगा। वर्तमान में जिले में कई गांवों में केवल निजी बसें ही संचालित हो रही हैं। इस कारण ग्रामीणों को तहसील या जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए बसों का काफी देर तक इंतजार करना पड़ता है। इसके अलावा भी कई ग्रामीणों को निजी वाहनों का सहारा लेकर मुख्यालय पहुंचना पड़ रहा है। गौरतलब है कि पूर्व सरकार ने वर्ष 2013 में ग्रामीण क्षेत्रों को रोडवेज से जोड़ने के लिए योजना तैयार की गई थी, लेकिन समय पर रूट परमिट नहीं मिलने के कारण ग्रामीण क्षेत्रों को रोडवेज से जोड़ा नहीं गया था।

ये थी सरकार की योजना

ग्रामीणक्षेत्रों को रोडवेज की बसों से जोड़ने के लिए वर्ष 2013 में सरकार ने प्रस्ताव लिया था। इस प्रस्ताव में सरकार ने जिले के सभी तहसील गांवों को रोडवेज सेवा से जोड़ने के लिए राजस्थान ग्रामीण परिवहन सेवा शुरू की गई थी। इसको लेकर गत वर्ष 20 जून को पाली डिपो में जिले की सभी ग्राम पंचायतों को राजस्थान ग्रामीण परिवहन सेवा को पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) आधार से जोड़ने को लेकर बस ऑपरेटर्स के साथ बैठक हुई। बैठक में रोडवेज अधिकारियों ने सरकार की इस योजना के बारे में बस ऑपरेटर्स को जानकारी दी गई। साथ ही 27 जून 2013 तक इस योजना के लिए बस ऑपरेटर्स को आवेदन करने थे, लेकिन अंतिम समय तक पाली डिपो में एक भी आवेदन प्राप्त नहीं हुआ। सरकार ने गांवों के लिए नई मिनी बसें खरीदकर राज्य के सभी डिपो में भेजा था। पाली फालना डिपो में करीब 18 नई बसें आई थीं, लेकिन परिवहन विभाग जयपुर की ओर से रोडवेज को रूट परमिट का चार्ट नहीं देने से डिपो में नई बसें ग्रामीणों क्षेत्रों में नहीं चल सकी। इसके बाद सरकार ने रोडवेज डिपो में धूल फांक रही ग्रामीण रूट की बसों को नेशनल परमिट पर चलाने के निर्देश दिए थे।

बन रहा है नया रूट

^ग्रामीणक्षेत्रों में रोडवेज की बसें चलाने के लिए नया रूट बनाया जा रहा है। डिपाे में रूट चार्ट परमिट मिलने के बाद ग्रामीण रूट की बसों को गांवों में चलाया जाएगा। पूर्व में रूट चार्ट के अभाव में बसों को ग्रामीण क्षेत