13 माह का होगा संवत 2072
विक्रम संवत 2072 धर्मभावना रखने वालों के लिए विशेष रहेगा। इस साल में अधिकमास है। आषाढ़ दो होंगे। आषाढ़ शुक्ल पक्ष प्रतिपदा 17 जून से आषाढ़ कृष्ण पक्ष अमावस 16 जुलाई तक अधिकमास के उत्सव होंगे। पंडित अश्विन दवे के अनुसार तीस दिन के दौरान मंगलकार्य वर्जित रहेंगे। इन दिनों में कथा का श्रवण करना, दान-पुण्य करना माना गया है। अधिकमास में 33 वस्तुओं का दान करने का महत्व है। पहले आषाढ़ का कृष्ण पक्ष तीन जून से 16 जून तक रहेगा। द्वितीय आषाढ़ का शुक्ल पक्ष 17 जुलाई से 31 जुलाई तक रहेगा। इससे पहले अधिकमास कैलेंडर वर्ष 2012 में था।
इसलिएहोता है अधिकमास
एकसंक्रांति से दूसरी संक्रांति का समय अर्थात सूर्य का एक राशि भोग सौर मास कहलाता है। तथा एक अमावस्या से से दूसरे अमावस्या तक का समय चंद्रमास कहलाता है। एक सौर मास तीस दिन, 26 घटी, 15 पल का होता है। जबकि चंद्रमास 29 दिन 34 घटी 20 पल का होता है। दोनों मास में 51 घटी 55 पल का अंतर रहता है। यह अंतर प्रतिमास बढ़ने से लगभग एक चंद्रमास के बराबर का हो जाता है। जो अधिकमास कहलाता है। यह चंद्रमास सूर्य संक्रांति विहीन होता है। इस चंद्रमास में सूर्य संक्रांति नहीं होती। इसे मलमास या पुरुषोत्तम का महीना भी कहा जाता है।
अधिकमासमें ये वर्जित
अधिकमासदान-पुण्य करने कथा सुनने का महीना माना गया है। इस महीने में सूर्य संक्रमण होने से गृह प्रवेश, मुंडन, विवाह, तीर्थयात्रा, वास्तु कार्य, देवप्रतिष्ठा, तुलादान, यज्ञ कर्म, संडास, नाम व्रत सहित कूल 35 कार्य को करना निषेध माना गया है।