\"धन को अच्छे कार्यांे में लगाएं\'
धनदेने से यश मिलता है, लक्ष्मी का सदुपयोग करने से धर्म में आस्था बढती है। जैन धर्म कहता है कि धन का सही उपयोग हो। इससे समाज और परिवार दोनों का उद्धार होगा। ये विचार रैवासा स्थित श्री दिगंबर जैन भव्योदय अतिशय क्षेत्र में आयोजित वार्षिक मेले के दौरान समारोह में आए अतिथियों ने व्यक्त किए। वक्ताओं ने कहा कि सुख दुख की परिभाषा पुण्य से आती है। जो व्यक्ति दुख को नहीं समझता, वह भगवान का भक्त कभी नहीं बन सकता। रविवार को आयोजित वार्षिक जैन मेले के दौरान जयपुर, सीकर, धोद, दांतारामगढ़, रानोली, कोछोर, फतेहपुर, मूंडवाड़ा खूड़ आदि स्थानों से जैन धर्मावलंबी पहुंचे। जैन कमेटी के कार्यकारी अध्यक्ष दीपचंद काला ने बताया कि वार्षिक मेले के कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेशचंद तिजारिया जयपुर ने की। मुख्य अतिथि प्रकाशचंद्र अजमेरा थे। ध्वजारोहण भागचंद अंकित कुमार भरतिया ने किया। इससे पहले सुबह सीकर नसियां से पैदल यात्रा रैवासा नसियां पहुंची।