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फतेहपुर में 211 गायों को इतने ही पंडित सुना रहे हैं भागवत कथा

4 वर्ष पहले
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कवि सम्मेलन में वीर रस पर झूमे श्रोता

बुधगिरीजीमढ़ी पर चल रहे नौ दिवसीय बुधगिरी गोमहिमा महोत्सव के पहले दिन शुक्रवार रात्रि में आयोजित कवि सम्मेलन में कवियों ने गोभक्ति, राष्ट्र भक्ति से ओतप्रोत कविताओं का ऐसा समां बांधा कि सुबह चार बजे तक श्रोता पांडाल में डटे रहे। कवि अब्दुल गफ्फार खान जयपुर, योगेंद्र शर्मा भीलवाड़ा ने राष्ट्रप्रेम, शहीदों पर कविताओं पाठ किया। महंत दिनेशगिरी सहित अन्य संतों ने भी उत्साह बढ़ाया। भारत माता की जय, वंदेमातरम के नारों से पांडाल गुंजायमान हो गया। संचालन कवि कमल मनोहर ने किया।

रामचंद्र नारनोलिया लक्ष्मणगढ़ ने आतंकवाद पर सरकार की कमजोर मानसिकता पर प्रहार करते हुए कहा कि आतंकियों को बिरयानी पराेसते हैं। शहर काेतवाल महावीरसिंह ने पद्‌मिनी के जौहर, राजस्थान की वीर प्रसूता भूमि की प्रशंसा करते हुए फिल्मकार भंसाली पर तीखे प्रहार किया। उन्होंने सुनाया कि मरूघर आली रेत म्हारे माथै रो चंदन है, इण पदमण आली मायड़ ने, म्हारो नित उठ वंदन है। जो समझे प्रेम की बोली, उसकी बोली गोली है, गीता में भी यह बात तो श्रीकृष्ण ने बोली है। मंदसोर मध्यप्रदेश के मुन्ना बैटरी ने अपनी चुटीली व्यंगोक्तियों द्वारा कवि सम्मेलन का माहौल ही बदल दिया। उन्होंने भ्रष्टाचार, आतंकवाद, नोटबंदी, असहिष्णुता सहित सभी विषयों पर व्यंग्य करते हुए प्रधानमंत्री मोदी, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल और अखिलेश सिंह किसी को भी नहीं बख्शा। नैनीताल की गौरी मिश्रा ने प्रेम, प्यार की चुटीलियां सुनाकर फिजां का रंग बदल दिया। उनकी संचालक कमल मनोहर के साथ चुटीली नोकझोंक ने श्रोताओं का अच्छा मनाेरंजन किया। अब्दुल गफूर जयपुर ने गोमाता पर कविता सुनाई तो खूब दाद मिली। सुरेंद्र यादवेंद्र बारां ने शहीद हनुत्थपा की वीरता का बखान किया। योगेंद्र शर्मा भीलवाड़ा ने वीर रस से समां बांधा। महंत दिनेशगिरी ने उन्हें मंच पर जाकर आशीर्वाद दिया। हरीश हिंदुस्तानी नवलगढ़ ने अपनी चुटीली कविताओं और बीच बीच में व्यंगय विनोद के वाणों से माहौल को नया रंग दिया।

फतेहपुर. कथा स्थल पर 211 गायों को श्रीमद् भागवत कथा सुनाते 211 पंडित।

फतेहपुर. बुधगिरीजी गोमहिमा महोत्सव में कवि सममेलन में रचना सुनाते मंच पर मौजूद कवि।

भास्कर न्यूज | फतेहपुर

बुधगिरीमढ़ी पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा अनेक मायनों पर अनोखी है। कथा स्थल पर व्यासपीठ के पीछे दो स्थानों पर गोमाता का स्थाान बनाया गया है। कथा के समय गोभक्त गोमाता अैार बछड़े की पूजा-अर्चना और सेवा करते हैं। कथा में मुख्य पांडाल के दोनों तरफ 211 गोमाताओं के लिए स्थान बनाया गया है। प्रत्येक गाय के पास विप्रजन रीमद् भागवत कथा पारायण का पाठ सुनाता है। इस प्रकार पांडाल में 211 गाेमाताओं को 211 पंडित श्रीमद् भागवत कथा सुना रहे हैं।

सात दिन में ये पंडित गोमाता को श्रीमद् भागवत के सभी 18 हजार श्लोक सुनाएंगे। इसके लिए प्रत्येक पंडित पांडाल में गाय के पास बैठकर प्रतिदिन करीब आठ घंटे श्लोकों का वाचन करते हैं। इसके लिए प्रतिदिन सुबह आठ से 12 और दोपहर दो से छह बजे तक श्रीमद् भागवत कथा करते हैं। मुख्य कथा जगदगुरु द्वाराचार्य मलूकपीठाधीश्वर स्वामी राजेंद्रदास देवाचार्य द्वारा प्रतिदिन 12.30 से 3.30 तक की जाती है।

इसतरह मिली प्रेरणा

महंतदिनेशगिरी ने बताया कि सनातन धर्म में गाय को मूल आधार माना गया है। सभी 33 करोड़ देवी-देवताओं के अतिरिक्त वेदों सहित सभी धर्मग्रंथों का समावेश भी गोमाता में माना गया है। कलियुग में गो, श्रीमद् भागवत कथा और गंगा को मोक्षदायिनी माना गया है। लोकदेवता बुधगिरी महाराज की जीवित समाधि का यह 211वां वर्ष है। बुधगिरीजी महाराज परम गोभक्त थे। 211 गायों को 211 पंडितों द्वारा श्रीमद् भागवत कथा सुनाने से मढ़ी पर असाधारण आध्यात्मिक ऊर्जा का संचरण होगा। इसके लिए बुधगिरीजी महाराज की प्रेरणा से इस आयोजन को करने का निश्चय किया गया। मंत्री राजेंद्र राठौड़, जिला प्रमुख अपर्णा रोलन आदि ने गोमहिमा महोत्सव में शामिल होकर महंत दिनेशगिरी से आशीर्वाद लिया।

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