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सिपाही राजेंद्र कुमार को नम आंखों से दी अंतिम विदाई

7 वर्ष पहले
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नेछवा. हादसेके बाद वाहन हटाते समय कार की चपेट में आने से मौत के शिकार हुए दादिया थाने के ड्राइवर राजेंद्र प्रसाद का गुरुवार को जाजोद गांव में राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। बड़े बेटे रजत ने मुखाग्नि दी। पांच सलामी गार्ड ने हवा में फायर कर सलामी दी। तिरंगे में लिपटे अपने लाडले को देखकर ग्रामीणों की आंखें नम हो गई। पार्थिव शरीर पर लक्ष्मणगढ़ डीएसपी सुमित कुमार, सीकर ग्रामीण सीओ कमल चौहान, विधायक गोविंदसिंह डोटासरा, दादिया थानाधिकारी मदनलाल कड़वासरा, एसआई कमल कुमार, नेछवा थानाधिकारी संजय पूनियां ने पुष्पचक्र अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। इस अवसर पर प्रधान बद्रीनारायण थालौड़, फतेहपुर कृषि उपज मंडी के अध्यक्ष राजेंद्र पाटोदा, सरपंच लियाकत खां समेत कई जनप्रतिनिधियों ने भी श्रद्धासुमन अर्पित किए।

तीनघंटे पहले बेटे से मिलकर गए थे : राजेंद्रकुमार सीकर में आदर्श पब्लिक स्कूल में पढ़ रहे अपने बड़े बेटे रजत से हादसे से तीन घंटे पहले ही मिले थे। रजत ने बताया कि बुधवार शाम साढ़े पांच बजे स्कूल में आकर पापा ने उसे मन लगाकर पढ़ने बड़ा आदमी बनने के लिए कहा था। राजेंद्र ने स्कूल के शिक्षकों से भी उसकी पढ़ाई पर ध्यान देने को कहा था। दो दिन पहले राजेंद्र घर भी आए थे।

मकानबनवाकर बेटियों को ब्याहना चाहते थे : परिजनोंने बताया कि मकान में केवल फर्श का काम बाकी है। उनकी इच्छा थी कि मकान बनने के बाद दोनों बेटियों की शादी करेंगे। राजेंद्र के दो बेटियां दो बेटे हैं। बड़ा बेटा रजत सीकर में 12वीं कक्षा में पढ़ रहा है। छोटा बेटा नवीन गांव में ही पढ़ाई कर रहा है।

परिजनोंका बुरा हाल : प|ीसुमित्रा ने पति का चेहरा देखा तो गश खाकर गिर पड़ी। बेटी सोनिया शिवानी को पता चला तो वे पिता से मिलने की जिद करने लगी। घर में कोहराम देखकर साथी सिपाहियों की आंखें भी भर आई। सात भाई-बहनों में दूसरे नंबर के राजेंद्र हंसमुख मिलनसार थे। थानेमें दिनभर गमगीन रहा माहौल: दादियाथाने में बुधवार रात से ही गमगीन माहौल था। राजेंद्र के साथियों ने बताया कि हंसमुख और धार्मिक प्रवृत्ति के राजेंद्र से थाने में किसी से मतभेद नहीं था। वे किसी काम के लिए मना नहीं करते और उत्साह के साथ उसमें जुट जाते। उनके पिता खींवाराम आर्मी से सेवानिवृत्त हैं।

नेछवा. विलाप करती परिवार की महिलाएं उनकी बेटियां।