21 साल की अपर्णा बनीं जिला प्रमुख
गांव का विकास रूक जाता है क्योंकि, बजटका ठीक से उपयोग में नहीं होता। उदाहरण के लिए पिछले कार्यकाल में टीएफसी-योजना में 3.37 करोड़ रुपए मिले। लेकिन खर्च हुए सिर्फ 3 करोड़ रुपए। इसलिए अब नए सदस्यों को मॉडल गांव वाले प्रोजेक्ट बनाने होंगे। जो पिछले कार्यकालों में नहीं हो पाए हैं।
जिला प्रमुख बनने के बाद अपर्णा रोलन ने शहर में भाजपा के दिग्गज नेताओं के साथ जनता का अभिवादन किया। वे पहली बार राजनीति में आई हैं।
पाटन में तहसील से 50 मीटर दूर कुछ लोगों ने वार्ड सात से भाजपा की महिला पंचायत समिति सदस्य को उठाकर ले जाने का प्रयास किया। वहां मौजूद लोगों ने बीच बचाव कर उसे छुड़ाया। दोपहर बाद सवा तीन बजे दोनों ही दलों के सदस्यों ने मतदान शुरू किया जो पौने चार बजे निर्दलीय सदस्य जयराम सिंह के मतदान के साथ समाप्त हुआ। मतदान के बाद निर्वाचन अधिकारी ने मतगणना शुरू कर चार बजे संतोष गुर्जर को प्रधान घोषित किया।
उम्र कितने
26 वर्ष 01
60 वर्ष 02
39 वर्ष 01
23 वर्ष 03
33 वर्ष 01
फीसदी सदस्य ही ऐसे होते हैं जो बैठक में सवाल उठाते हैं। इनमें भी 70 फीसदी सवालों के नहीं मिलते जवाब।
बैठक होनी चाहिए। होती सिर्फ 15 से 18 हैं। तीन महीने में बुलानी चाहिए। जबकि वक्त इससे कहीं ज्यादा लग जाता है।
{क्या कभी ऐसा सोचा था?
कभीनहीं सोचा था, जिला प्रमुख बनूंगी। किस्मत ने आज मुझे बहुत कुछ करने का मौका दिया है।
{छोटीउम्र में बड़ी चुनौती कैसे स्वीकार करेंगी?
-अभी जिला परिषद को समझना होगा। बड़ा चैलेंज मिला है। स्वीकार करूंगी। सबको साथ लेकर काम करेंगे।
{विपक्ष में आपसे ज्यादा अनुभवी हैं। कैसे सुनेंगी?
सबकोसाथ लेकर चलेंगे। वाजिब मांग को सुना जाएगा।
अपर्णाही क्यों बनीं जिला प्रमुख?
भाजपामें जिला प्रमुख के लिए दो दावेदार थे। भाजपा के सभी विधायकों सांसद की सहमति के बाद अपर्णा के नाम पर मुहर लगी। प्रदेश नेतृत्व मुख्यमंत्री के यहां से इसी नाम के निर्देश मिलने से अपर्णा की राह आसान हुई।
जिला परिषद को समझना पहली चुनौती
पढ़ाई |राजस्थानयूनिवर्सिटी में फाइन आर्ट की स्टूडेंट। पढ़ाई जारी रखूंगी। पेंटिंग का बहुत शौक है।
पसंद|घूमनाकाफीपसंद है। अिभनेताओं में अमिताभ, शाहरुख फेवरेट हैं। शाकाहारी हूं। फास्ट फूड पसंद है।
तेरहवां वित्त आयोग के तहत केंद्र से प्रति व्यक्ति के हिसाब से पैसा आता है।
राज्य वित्त आयोग निर्बंध योजना में ग्राम पंचायत के विकास के लिए साल में तीन बार बजट मिलता है। मनरेगा के लिए केंद्र सरकार से हर साल पांच से छह करोड़ रुपए मिलते हैं। इसके अलावा भी कई तरह के टैक्स भी हैं।
जिला परिषद सदस्यों को अलग से कोई बजट नहीं मिलता। जैसे विधायक, सांसद सरपंचों को मिलता है। जिला परिषद सदस्य, पंचायतीराज विभाग की अनटाइड फंड, एसएफसी टीएफसी-13 योजना के जरिए विकास कार्य करवा सकते हैं। अलग-अलग समिति की बैठकों में यह एजेंडे रखे जाते हैं।
जिला प्रमुख का ग्रामीण क्षेत्र की प्रशासनिक पंचायतीराज संस्थाओं पर नियंत्रण रहता है। प्राकृतिक आपदा या जन-धन हानि में स्वविवेक से एक लाख रुपए की राशि का अधिकार 20 हजार के ऊपर के सभी चेक पर जिला प्रमुख के हस्ताक्षर होते हैं, जिसकी अधिकतम सीमा नहीं है।