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रोड पर पानी छोड़ें तो केस करो : मंत्री लोगों से जूते पड़वाओगे क्या? : सांसद

6 वर्ष पहले
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एडमिनिस्ट्रेटिव रिपोर्टर | सीकर

सहकारितामंत्री जिले के प्रभारी मंत्री अजयसिंह किलक ने बुधवार को जिले के अफसरों की पहली बैठक ली। किलक ने पानी की वजह से लगातार टूट रही सड़कों को लेकर कदम उठाने के निर्देश दिए। इस मामले में जब उन्होंने एफआईआर कराने की बात कही तो सांसद सुमेधानंद सरस्वती ने रोचक अंदाज में आपत्ति जताई।

किलक ने कहा कि कानून में देखिए कि क्या प्रावधान हैं। पहले लोगों को समझाएं, नोटिस दें। फिर भी नहीं मानें तो एफआईआर दर्ज कराएं। पीडब्ल्यूडी अफसरों ने कहा कि पुलिस एफआईआर दर्ज नहीं करती। हम तो तैयार हैं। इस पर सुमेधानंद ने कहा कि एफआईआर दर्ज कराकर जूते पड़वाओगे क्या? लोगों से समझाइश की जा सकती है। मंत्री ने कहा कि पहले लोगों से समझाइश और नोटिस की कार्रवाई ही करनी चाहिए। सड़क बनाते हुए नालियों का निर्माण भी करना चाहिए। सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण रोकने के निर्देश भी दिए। बैठक में प्रभारी सचिव मंजीत सिंह, एसपी डाॅ.रवि भी मौजूद थे।

मंगलवारगुरुवार को कर्मचारी नहीं छोड़ेंगे मुख्यालय : प्रभारीमंत्री ने निर्देश दिए कि मंगलवार गुरुवार को पटवारी से लेकर सभी विभाग के अफसर अपना मुख्यालय नहीं छोडेंग़े। वे लोगों के काम करेंगे। कलेक्टर भी इन दो दिनों में कोई बैठक नहीं करेंगे। बिजली विभाग के लाइनमैन भी ड्यूटी मुख्यालय नहीं छोड़ सकेंगे। प्रभारी मंत्री ने कहा कि इसकी रिपोर्ट बनाई जाएगी।

आगे से सबको बुलाएंगे : प्रभारीमंत्री अजय सिंह किलक ने इस मामले में पहले तो कहा कि ऐसी बात नहीं है। सभी को सूचना दी जाती है। जब कांग्रेस की ओर से प्रभारी सचिव मंजीत सिंह को की गई शिकायत के बारे में पूछा गया तो कहा कि विधायक किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि सभी का होता है और सरकार भी सभी को साथ लेकर चलती है। आगे से एक-एक जनप्रतिनिधि को बैठकों में बुलाया जाएगा।

सरकार की नाकामी उजागर होने के डर से हमें नहीं बुलाया: डोटासरा

कांग्रेसजिलाध्यक्ष लक्ष्मणगढ़ विधायक गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि पहली बार प्रभारी मंत्री बैठक लेने आए थे। इसमें कांग्रेस के विधायकों को नहीं बुलाया गया। यह सिर्फ इसीलिए किया गया कि हम सरकार की नाकामियों को उजागर करेंगे। अगली बार अगर कलेक्ट्रेट में बैठक होगी तो कांग्रेस विधायकों को बुलाना होगा अन्यथा मंत्री का घेराव किया जाएगा।

प्रभारी मंत्री ने कहा कि पेयजल टैंकरों में सरपंच बड़ा घोटाला करते हैं। एक टैंकर लगाकर चार-पांच के पैसे उठा लेते हैं। कई बार विभाग के कर्मचारी खुद ही टैंकर भेज देते हैं। मेरे विधानसभा क्षेत्र में ऐसे मामले सामने आए हैं। यहां पर भी जांच करानी चाहिए। किलक ने यह भी कहा कि अधिकारी किसी से भी बदतमीजी से पेश आते हैं। लोगों को घंटों तक इंतजार कराते हैं। मंत्री ने नसीहत दी कि यह सिस्टम सुधारना होगा।

औरसांसद ने कहा-एसपी साहब गश्त मजबूत करो

सांसदसुमेधानंद ने एसपी डॉ. रवि को कहा कि गश्त मजबूत करें और गांवों में भी पुलिस गश्त की जाए। मेरे गांव में रात को रोड के किनारे खड़े ट्रक के टायर तक खोलकर ले गए। इस पर एसपी ने कहा कि चुनाव ड्यूटी की वजह से गश्त सही तरीके से नहीं हो पा रही थी। अब इस पर ध्यान दिया जा रहा है। चेन स्नेचिंग चोरियों की पिछले दिनों जो भी वारदातें हुई उन्हें चार पांच दिन में खोल दिया जाएगा। इसके अलावा मंत्री सांसद ने कहा कि फर्जी सिम लेकर मोबाइल काम में लेने वालों के खिलाफ भी सख्त कार्रवाई करे।

बैठक के दौरान मौजूद प्रभारी मंत्री, प्रभारी सचिव, जनप्रतिनिधि।

दो कस्बों में हेरिटेज | रामगढ़शेखावाटी फतेहपुर को हेरिटेज सिटी बनाने का प्रस्ताव भी कलेक्टर ने सौंपा है। क्योंकि दोनों ही जगह सबसे ज्यादा पर्यटक आते हैं।

अगरऐसा हुआ तो | दोनोंकस्बों को हेरिटेज सिटी बनाया जाए तो विकास की रफ्तार बढ़ सकती है। पर्यटकों की संख्या बढ़ने से स्थानीय लोगों की कमाई भी बढ़ेगी।

स्टेटलेवल स्पोर्ट्स एकेडमी | सीकरमें स्टेट लेवल की स्पोर्ट्स एकेडमी बनाने का प्रस्ताव भी दिया है। इस पर करीब 54 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। तीन साल में यह पूरा हो सकता है। इसमें बास्केटबॉल को तवज्जो देने की बात है।

हकीकत| अगरऐसा हुआ तो खेल स्टेडियम की तस्वीर भी बदल सकती है। भास्कर लगातार मुद्दा उठा रहा है। हालांकि झुंझुनूं स्पोर्ट्स यूनिवर्सिटी अभी तक नहीं बन पाने के कारण कई सवाल भी खड़े होते हैं।

शहर को सीवरेज| शहरमें सीवरेज के लिए फिर से कवायद की गई है। प्रस्ताव सरकार को भेज दिया गया है। इस बार 460 करोड़ रुपए का प्रोजेक्ट बनाया गया है।

हकीकत| 2009में यह प्रोजेक्ट बना। 38 करोड़ रुपए मांगे थे। लेकिन मिले सिर्फ आठ करोड़। कलेक्टर ने भी माना कि खर्चे का कोई मतलब नहीं था।

न्यूरोसर्जिकल यूनिट रींगस में ट्रोमा सेंटर

न्यूरोसर्जिकल यूनिट बनाई जाए। क्योंकि, मरीजों को जयपुर रैफर करना पड़ता है। सात करोड़ का प्रोजेक्ट है। इसके अलावा नेशनल हाईवे को देखते हुए रींगस में ट्रोमा सेंटर बनाया जा सकता है। जिस पर करीब आठ करोड़ रुपए का खर्चा है।

हकीकत| लगातारमांग उठती रही है लेकिन कभी मंजूरी नहीं मिली। नेशनल हाईवे पर ट्रोमा सेंटर बनाने की कवायद पिछली सरकार ने बजट में की थी लेकिन किसी भी हाईवे पर यह नहीं बने।