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दुर्गा महोत्सव : तीन कारीगर दस दिन में तैयार करते हैं मूर्ति
सीकर. नवरात्रके लिए शहर के गली-मोहल्लों में विशाल पांडाल बन रहे हैं तो शहर में करीब दो दर्जन कारीगर तीन महीने से देवी की मूर्तियां बनाने में जुटे हैं। कोलकाता से आए कारीगर शहर में राणी सती रोड स्थित अशोक विहार नवलगढ़ रोड पुलिया के नीचे मूर्ति बना रहे हैं। वे करीब 15 साल से यहां रहे हैं। 22 वर्षीय मूर्तिकार राजू ने बताया कि कोलकाता में पाल जाति के लोगों का मूर्ति बनाना पुश्तैनी धंधा है। वहां कम मजदूरी मिलने के कारण दूसरी जगह आना पड़ता है। एक कारीगर चार से 10 हजार तक कमा लेता है। हालांकि ये लोग नवरात्र महोत्सव अपने घर में ही मनाते हैं।
दो से 15 हजार तक की मूर्तियां : बंगालीकारीगरों द्वारा बनाई गई मिट्टी की मूर्तियां दो से 15 हजार रुपए तक बिक जाती हैं। 80 फीसदी मूर्तियां ऑर्डर से तैयार की जाती हैं। सीकर के अलावा फतेहपुर, झुंझुनूं, खेतड़ी लक्ष्मणगढ़ के श्रद्धालु मूर्तियां ले जाते हैं। जो मूर्तियां बच जाती हैं, यहीं छोड़कर घर लौटते हैं। तीन कारीगर 10 दिन में एक मूर्ति तैयार कर लेते हैं। कारीगरों की कमी के चलते एक आदमी 15 से 18 घंटे तक काम करता है।