मिड डे मील कृषि विभाग की योजनाओं में पिछड़ी जिला परिषद
किसानोंं को कृषि यंत्र उपलब्ध करवाने वाले योजना में 1721 किसानों का लक्ष्य था, लेकिन इस योजना में 724 किसानों को ही कृषि यंत्र उपलब्ध करवाए गए। पौध संरक्षण उपकरण बांटने का लक्ष्य भी पूरा नहीं हो पाया। इस योजना में 795 किसानों को पौध संरक्षण उपकरण बांटे जाने थे, लेकिन 358 को ही दिए गए। हालांकि मिनिकिट वितरण में सौ फीसदी लक्ष्य हासिल किया है।
स्वच्छभारत मिशन : लक्ष्मणगढ़ पाटन सबसे नीचे, बाकी जिले में लक्ष्य से ज्यादा काम : स्वच्छभारत मिशन में जिले की लक्ष्मणगढ़ पाटन पंचायत समिति में सबसे कम काम हुआ है। ये दोनों पंचायत समितियां लक्ष्य से भी पिछड़ी हुई हैं। इसके अलावा पूरे जिले में लक्ष्य से ज्यादा शौचालय बनवाए हैं। लक्ष्मणगढ़ में 77 फीसदी पाटन में 88 फीसदी लक्ष्य हासिल किया है। इसके अलावा दांतारामगढ़ में 181, धोद में 114, फतेहपुर में 146, खंडेला में 124, नीमकाथाना में 159, पिपराली में 107 श्रीमाधोपुर में 109 फीसदी लक्ष्य हासिल किया है।
52ग्राम पंचायतें ही हो पाई खुले में शौच से मुक्त : जिलेमें महज 52 ग्राम पंचायतेंं ही खुले में शौच से मुक्त हो पाई हैं। जिले की नौ पंचायत समितियों में 343 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें नीमकाथाना, पाटन और श्रीमाधोपुर ऐसी पंचायत समितियां हैं। इनमें केवल एक एक ग्राम पंचायत को ही खुले में शौच से मुक्त किया सका है।
आंगनबाड़ीकेंद्रों को आधुनिक बनाने के लिए एमओयू : नंदघरयोजना के तहत जिले के आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक बनाने के लिए भी एमओयू किया गया है। इसके तहत श्रीमाधोपुर की 206 रींगस की 20 आंगनबाड़ी केंद्रों को आधुनिक रूप से विकसित किया जाएगा। इसके लिए दानदाताओं का सहयोग लिया जाएगा।
{मिड डे मील योजना में पैसा कम खर्च हुआ है?
जिलेमें निजी स्कूलों की संख्या ज्यादा है। सरकारी स्कूल में पढ़ने वाले सभी बच्चों को इस योजना का लाभ मिल रहा है।
{स्वच्छभारत मिशन में लक्ष्मणगढ़ पाटन लक्ष्य से पीछे क्यों हैं?
जिलेमें इस मिशन के तहत अच्छा काम हुआ है और लक्ष्य से ज्यादा शौचालय बनाए हैं। लक्ष्मणगढ़ में बीडीओ नहीं है और पाटन नई पंचायत समिति है, इस कारण लक्ष्य से पीछे हैं।
{आगामीएक साल में क्या लक्ष्य?
2017तक पूरे जिले को खुले में शौच से मुक्त करने का लक्ष्य होगा। इसके अलावा भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जाएगा।
मिड-डे-मील योजना में इस एक साल में जिले में आधा बजट भी खर्च नहीं हो पाया। 3353 लाख रुपए उपलब्ध थे, लेकिन इसमें से 1228 लाख रुपए ही खर्च हो पाए। पूरे जिले में महज एक लाख 76 हजार 408 बच्चे ही इस योजना का लाभ ले पाए।