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आंचल केंद्र से प्रसूताओं का मोह भंग

7 वर्ष पहले
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गंगापुर सिटी. राजकीयआयुर्वेदिक औषधालय (ऊपर) तथा अंदर बंद पड़ा आंचल प्रसूता केंद्र (नीचे)।

मदनमोहन शर्मा | गंगापुर सिटी

सरकारप्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सा अन्य सुविधाएं मुहैया कराने के लिए काफी पैसा खर्च कर रही है, वहीं राजकीय आयुर्वेदिक औषधालय में प्रसव के लिए खोले गए आंचल केन्द्र के उद‌्घाटन के 9 माह बाद भी विशेषज्ञ चिकित्सकों के नहीं होने से अभी तक यहां एक भी डिलेवरी नहीं हुई है।

उद‌्घाटन के बाद से ही आंचल प्रसूता केन्द्र पर ताला लटका हुआ है। इतना ही नहीं बजट उपलब्ध होने के बावजूद प्रसूताओं को तो औषधियां मिल रही है और ही खाने-पीने की सामग्री। इस कारण औषधालय में खोले गए आंचल प्रसूता केन्द्र का कोई लाभ नहीं मिलने प्रसूताओं का इससे मोह भंग हो रहा है।

येहै योजना

राजकीयआयुर्वेदिक औषधालय में प्रसव गर्भवती महिलाओं को बेहतर चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से सरकार ने 31 अगस्त 2013 में यहां लाखों रुपए खर्च कर अलग से आंचल प्रसूता केन्द्र की स्थापित किया था। आंचल प्रसूता केन्द्र बनने के बाद 12 जनवरी 2014 को विधायक मानसिंह गुर्जर ने औषधालय में बनाए गए आंचल प्रसूता केन्द्र नि:शुल्क औषधि वितरण केन्द्र का उद‌्घाटन किया था। इसके उद‌्घाटन के 9 माह बाद भी विशेषज्ञ चिकित्सक की नियुक्ति नहीं की गई। विशेषज्ञ चिकित्सक महिला नर्स नहीं होने के कारण अभी तक आंचल प्रसूता केन्द्र में एक भी डिलेवरी नहीं हुई।

बजटऊंट के मुंह में जीरा

राजकीयआयुर्वेदिक औषधालय में आने वाले सामान्य मरीजों के उपचार के लिए रसायन शाला भरतपुर से औषधियां उपलब्ध कराई जाती है। औषधालयों को संसाधनों के लिए जो बजट दिया जाता है वह ऊंट के मुंह में जीरे के समान है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि औषधालय में प्रसूता और गर्भवती महिलाओं के सालभर की खाद्य सामग्री क्रय के लिए मात्र 40-50 हजार रुपए ही बजट के रूप में मिलता है। दूसरी तरफ आंचल प्रसूता केन्द्र में 2 लाख रुपए औषधि और करीब 50 हजार रुपए प्रसूताओं और गर्भवती महिलाओं की खाद्य सामग्री वितरण के लिए बजट के रूप में मिलने के बावजूद तो गर्भवती महिलाओं प्रसूताओं के खाने के लिए खाद्य सामग्री की खरीद की गई है और ही उनकी औषधी की खरीद की गई है। औषधालय में पहले की दवाओं में से ही वितरित की जा रही है। इतना ही नहीं प्रसूताओं और गर्भवती म